मंडी धनौरा थानाक्षेत्र के मिलक मोतीखेड़ा में किसान देवेंद्र सिंह का परिवार रहता है। सात मार्च 2018 को देवेंद्र सिंह भाई रवि के साथ कुआंखेड़ा से सामान लेकर घर लौट रहे थे। दोनों भाई गांव के बाहर देसी शराब की दुकान के सामने पहुंचे, तो वहां पहले से खड़े सुखबीर ने दो अज्ञात साथियों के साथ उन्हें रोक लिया और गाली-गलौज की। रवि ने इसका विरोध किया तो सुखबीर ने जान से मारने की नीयत से तमंचे से गोली मार दी।
लोगों की मदद से देवेंद्र ने घायल रवि को अस्पताल में भर्ती कराया। उधर, सुखबीर वारदात को अंजाम देकर दोनों साथियों के साथ भाग गया था। पुलिस ने देवेंद्र की तहरीर पर सुखबीर और उसके दो अज्ञात साथियों के खिलाफ हत्या की कोशिश का रिपोर्ट दर्ज की थी। साथ ही सुखबीर को गिरफ्तार करने के बाद कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था। तभी से वह जेल में बंद है।
मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्वरित प्रथम नाजनीन बानो की अदालत में चल रही थी। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव चौधरी ने बताया कि शुक्रवार को कोर्ट ने मुकदमा में आखिरी सुनवाई की और साक्ष्यों व सबूतों के आधार पर आरोपी सुखबीर को दोषी करार दिया और उसे सात साल की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। उन्होंने बताया कि सुखबीर उर्फ पपिया जिला का टॉपटेन बदमाश है। उसके खिलाफ कई मुकदमे अलग-अलग कोर्ट में विचाराधाीन हैं।
पुलिस पर फायरिंग करने में भी हुई थी छह साल की सजा
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव चौधरी ने बताया कि 10 जुलाई 2018 को तत्कालीन थानाध्यक्ष नवाब सिंह फोर्स के साथ नौगांवा सादात रोड पर गश्त रहे थे। इस बीच धनौरा के मिल्क मोती बेड़ा निवासी राहुल और उसके पिता देवराज के पर गांव के ही सुखबीर उर्फ पपिया ने जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी और उनकी बाइक लूट कर भाग निकला था। पुलिस ने पकड़ने की कोशिश की तो बाइक सवार बदमाशों जानलेवा फायरिंग शुरू कर दी थी। एक गोली इंस्पेक्टर की बुलेट प्रूफ जैकेट और दूसरी गोली कांस्टेबल विनीत कुमार के हाथ में लगी थी। पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की सुखबीर जख्मी हो गया था। इस मुकदमे की सुनवाई करते हुए 24 मार्च 2025 को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्वरित प्रथम नाजनीन बानो की अदालत ने उसे छह साल आठ माह की सजा और एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।