क्राइम मैप में अपराध, इसकी प्रकृति, घटनास्थल, समय व मौके पर कौन अधिकारी पहुंचा, इसकी एंट्री की जाती है। इससे आला अफसर अपराधों का ब्योरा जान सकते हैं।
प्रदेश के पुलिस महानिदेशक जावीद अहमद ने प्रदेश के समस्त पुलिस अधीक्षकों व अपर पुलिस अधीक्षकों को क्राइम मैप बनाने के आदेश जारी किए हैं।
क्राइम मैपिंग में अपराध इसकी प्रकृति, घटनास्थल, थाना क्षेत्र, समय आदि का ब्योरा होता है। इसमें यह भी दिखाया जाता है कि घटनास्थल पर कौन अधिकारी गया था। पुलिस महानिदेशक का मकसद प्रदेश के जनपदों की अपराध की स्थिति का जायजा लेकर अपराध को नियंत्रित करना है। जिससे बढ़ रहे अपराधों को रोकने के लिए अधिकारियों के पेंच कस सकें। पुलिस महानिदेशक के आदेश को मुरादाबाद, बिजनौर व बदायूं के पुलिस अफसरों ने गंभीरता से नहीं लिया है।
क्राइम मैप बनाने में इनकी प्रगति शून्य है। बरेली में 9 मामले और रामपुर जिले में अभी तक 29 मामले, संभल में 16, पीलीभीत व शाहजहांपुर जिले ने एक-एक मामले की एंट्री की गई है। क्राइम मैप बनाने में यह अमरोहा से काफी पीछे चल रहे हैं। कई जिले ऐसे हैं, जिन्होंने अभी शुरुआत भी नहीं की है। अपने जिले में अपर पुलिस अधीक्षक उदय शंकर सिंह के निर्देश पर बनाए जा रहे क्राइम मैपिंग में 1083 मामलों की एंट्री कर पूरे जोन में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है।
अपर पुलिस अधीक्षक उदय शंकर सिंह ने बताया कि हत्या, लूट, दंगा, बलवा, चोरी, वाहन चोरी, अपहरण, दहेज हत्या, डकैती, महिलाओं के प्रति अपराध, बच्चों के प्रति अपराध, चेन स्नेचिंग, हत्या का प्रयास, घटनास्थल समेत 16 मामलों की क्राइम मैप पर एंट्री की जानी है। जिससे पुलिस के उच्च अफसरों को यह पता चल सके कि किस जनपद की अपराध नियंत्रण में कैसी स्थिति है। ताकि वह उनको अपराध नियंत्रण के लिए निर्देशित कर सकें।
क्राइम मैप बनाने में अपने जिले का प्रदर्शन पूरे जोन में सबसे अच्छा है। क्राइम मैप बनाने में लगे पुलिसकर्मी व अफसर इसके लिए बधाई के पात्र हैं। जिन्होंने कठिन मेहनत कर जनपद को जोन में पहले स्थान पर ला खड़ा किया है। उनके सहयोग के बिना क्राइम मैप बनाने का काम आसान नहीं था।-उदय शंकर सिंह, एएसपी