डिडौली कोतवाली क्ष्ाेत्र में शुक्रवार को इंजेक्शन लगाने के बाद एक क्लीनिक में मासूम की तबीयत बिगड़ गई। यह देख परिजनों के होश उड़ गए। आनन फानन में उसको लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद चिकित्सक क्लीनिक बंद कर भाग निकला।
परिजनों ने चिकित्सक पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सुलह की वजह से दोपहर तक कोई तहरीर नहीं दी। चार घंटे तक अस्पताल में लाश रखी रही। इसके बाद परिजन बिना कानूनी कार्रवाई कर शव घर ले गए। इधर पता चलने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने क्लीनिक को सील कर नोटिस चस्पा कर दिया है। डाक्टर को डिग्रियां दिखाने के लिए तीन दिन की मोहलत दी है।
डिडौली कोतवाली क्षेत्र के ढकिया गालमपुर गांव निवासी नन्हे की बेटी सानिया (7) किसान इंटर कालेज बीटा में कक्षा तीन में पढ़ती थी। बीते कई दिनों से उसको खुजली हो रही थी। सोमवार को मां इशरत जहां उसको लेकर सुबह 11 बजे इकौंदा गांव में स्थित एक क्लीनिक पर पहुंची। यहां पर डाक्टर ने उसकी तबियत देखते हुए दो इंजेक्शन लगाए। थोड़ी देर में ही उसकी हालत बिगड़ने लगी।
देखते चिकित्सक के होश उड़ गए। मां भी बेचैन हो गई। उसने फौरन परिवार को स्थिति से अवगत कराया। परिवार के लोग उसको लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जोया आ गए। जहां डाक्टर ने नब्ज देखते ही मृत घोषित कर दिया।
बेटी की मौत होते ही परिजन रोने बिलखने लगे। चिकित्सक पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया और कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा करने लगे। चार घंटे तक लाश अस्पताल में रही। परिजन कभी तहरीर देने और कभी न देने पर ही विचार करते रहे। दोपहर बाद उन्होंने मसले में कानूनी कार्रवाई से इंकार कर दिया।
पीएम की बजाय लाश को अपने साथ घर ले गए। जहां उसको सुपुर्द ए खाक कर दिया। इधर भनक लगने पर स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी गांव पहुंचे। क्लीनिक को सील कर नोटिस चस्पा दिया, जिसमें चिकित्सक को तीन दिन में अपनी डिग्रियां सीएमओ कार्यालय में दिखाने के लिए कहा गया है।