उझारी/सैदनगली (अमरोहा)। अमरोहा के सिपाही की बागपत में हुई मौत की खबर सुनते ही परिजनों में कोहराम मच गया। वह बेटे को देखने के लिए बागपत के लिए निकल पड़े। गांव में माहौल गमीन हो गया। सिपाही प्रवीण अभी अविवाहित था। कुछ दिन पूर्व सिपाही ने पित्त की थैली में पथरी का ऑपरेशन कराया था। जिसकी वजह से वह अस्वस्थ्य महसूस कर रहा था। छुट्टी लेकर घर आना चाहता था, लेकिन इसी बीच उसकी मौत की खबर से परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट गया।
सैदनगली थाना क्षेत्र के गांव तरारा खुर्द निवासी राजेंद्र जाटव का पच्चीस वर्षीय बेटा प्रवीण कुमार वर्ष 2016 में पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। काफी दिनों से बागपत जनपद में उसकी तैनाती थी। इस समय वह दोघट थाने की टीकरी चौकी पर तैनात था। गुरुवार को मौत की सूचना जैसे ही परिजनों को मिली रोते बिलखते बेटे को देखने के लिए निकल पड़े। परिवार के सदस्य रूपकिशोर के मुताबिक प्रवीण की पित्त की थैली में पथरी की शिकायत थी। कुछ दिन पूर्व उसने पथरी निकलवाने के लिए ऑपरेशन कराया था। ऑपरेशन के बाद करीब दो माह की छुट्टी लेकर वह गांव आया था और पंद्रह दिन पूर्व ही गांव से ड्यूटी पर गया था। जब गया था तब वह पूरी तरह से स्वस्थ्य नहीं हो पाया था। घर रोजाना मोबाइल पर होने वाली बातचीत में वह बताता था कि उसका स्वास्थ्य ठीक नहीं है। वह रोजाना छुट्टी के लिए अपने विभाग के अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दे रहा है। लेकिन छुट्टी नहीं मिल पा रही है। जिसकी वजह से परिजन भी बहुत परेशान थे। इसी बीच सिपाही की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। जानकारी मिलते ही थानाध्यक्ष मोहित चौधरी प्रवीण के घर पहुंचे और परिवार के सदस्यों को सांत्वना देते हुए मौत की वजह के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश भी की। प्रवीण चार बहन भाइयों में बड़ा था, छोटा भाई सोबिंद्र, उससे छोटी बहन शिवानी, सलोनी अभी पढ़ते हैं। बहन भाई के साथ मांग जगवती का रो-रोकर बुराहाल है।
परिजनों को बताया दिमाग की नस फट गई
उझारी। गांव तरारा खुर्द निवासी सिपाही प्रवीण की मौत बागपत में हुई। लेकिन परिजनों को मौत की सूचना नहीं दी गई। प्रवीण के परिवार के सदस्य रूपकिशोर ने बताया कि संबंधित थाने से उनके घर फोन कर बताया गया कि प्रवीण के दिमाग की नस फट गई है। जिससे सुनते ही परिजनों के पैरों के तले से जमीन खिसक गई।
देरशाम तक भी गांव नहीं पहुंचा शव
उझारी। गांव तरारा खुर्द निवासी सिपाही प्रवीण की बागपत की पुलिस चौकी में हुई मौत के बाद प्रवीण का पीएम के बाद शव देरशाम तक भी गांव नहीं पहुंचा। परिवार के सदस्य व गांव के लोग प्रवीण के शव आने का इंतजार करने में हैं। प्रवीण की मौत से गांव का माहौल पूरी तरह से गमगीन हो गया।
प्रवीण पर थी परिवार की जिम्मेदारी
उझारी। सिपाही प्रवीण पर ही पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी। छोटे भाई बहनों की पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारी सिपाही प्रवीण पर ही थी। तीन वर्ष पहले जब प्रवीण सिपाही बना था। तब से परिवार के सदस्य बहुत खुश थे। घर के ज्यादातर निर्णय प्रवीण ही लिया करता था। लेकिन ऐसा क्या मालूम था कि प्रवीण अपनी जिम्मेदारी निभाई बिना ही इस दुनिया से चला जाएगा।