इसके अलावा गर्मियों की छुट्टियों में परिवहन विभाग की टीमें स्कूलों में जाकर वाहनों का निरीक्षण करेंगी। पंजीयन निरस्त वाले 95 स्कूली वाहन सड़कों पर चलने लायक नहीं बचे हैं। ऐसे में अगर इन वाहनों से बच्चों को स्कूल लाते या ले जाते पाया गया तो स्कूल प्रबंधक और वाहन मालिकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
निजी स्कूल संचालकों ने छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था तो कर ली, लेकिन जनपद की सड़कों पर दौड़ रहे अधिकतर वाहन अनफिट है। इनमें बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहती है। जिले के कुछ स्कूलों को छोड़कर बाकी स्कूलों के वाहनों की गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में जिले करीब 610 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं, लेकिन सड़कों पर इससे कहीं ज्यादा स्कूली वाहन दौड़ रहे हैं।
अमूमन हर मार्ग पर ऐसे खतरनाक वाहन फर्राटा भर रहे हैं। मैक्स, मारुति वैन व टाटा मैजिक सहित तमाम वाहन स्कूली बच्चों को ढोने का काम कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश की हालत बेहद खस्ता है। जबकि, कई वाहनों में तो नियम विरुद्ध गैस किट भी लगे हैं और इन वाहनों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं है। साथ ही फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है।
अब स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन संजीदा हो गया है। एआरटीओ महेश शर्मा ने बताया कि अनफिट स्कूली वाहन के 152 मालिकों को नोटिस दिए गए हैं। इसके अलावा 95 वाहनों के पंजीयन निरस्त कर दिए गए हैं। अगर इन वाहन मालिकों ने जल्द ही फिटनेस और स्कूल वाहन मानकों का पालन नहीं किया तो मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।