अमरोहा। लॉकडाउन-4 में मिली सहूलियत भी कॉटनवेस्ट कारखाने को रास नहीं आ रहा है। कारखाने खुल तो गए हैं लेकिन कतरन का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। रेडीमेड कपड़े बनाने वाली फैक्ट्रियों के बंद होने से कतरन की सप्लाई नहीं ठप है। ऐसे में कॉटनवेस्ट कारखाने की मशीनों को कतरन की खुराक नहीं मिल पा रही है। अब अमरोहा के करीब सवा तीन सौ कॉटनवेस्ट कारखाने को कपड़ा फैक्ट्रियों के चलने का इंतजार है। इसके बाद ही कारोबार दौड़ पाएगा।
जिले में छोटे बड़े करीब सवा तीन सौ कॉटनवेस्ट कारखाने हैं। हालांकि मौजूदा समय में चालू हालत में सवा सौ कारखाने की है। जहां कतरन से रुई तैयार की जाती है। जिसे यूपी समेत दूसरे प्रदेशों में सप्लाई किया जाता है। इसके अलावा कॉटनवेस्ट में कतरन की सप्लाई और ट्रेडिंग के काम से कारोबारी जुड़े हैं। लॉकडाउन में कारखाने बंद पड़े रहे। कारोबार ठप रहा। हालांकि लॉकडाउन-4 में सरकार से कारोबारियों को सहूलियत मिली है। लेकिन कॉटनवेस्ट कारोबार को इससे अभी कुछ लाभ मिलता नहीं दिख रहा है। इसकी वजह कतरन की सप्लाई है। रेडीमेड कपड़ों की फैक्ट्रियां अभी बंद है। इसके चलते कतरन नहीं निकल रहा है। बिना कतरन अमरोहा के कॉटनवेस्ट कारखाने शुरू नहीं हो सकते हैं। ऐसे में यहां के कारोबारी कपड़ा फैक्ट्रियों के चलने का इंतजार कर रहे हैं। कतरन की सप्लाई होने पर कारोबार रफ्तार पकड़ेगा।
यहां से जिले में आता है कतरन
- दिल्ली, लुधियाना, मुंबई, पानीपत में संचालित रेडीमेड कपड़ा फैक्ट्रियों से
किस कारोबार से कितने कारोबारी जुड़े
- कतरन सप्लाई के काम से करीब 100 कारोबारी
- मशीन से रुई बनाने के करीब 325 कारखाने
- रुई की टेडिंग से जुड़े 20 से 25 कारोबारी
चार से पांच हजार मजदूर
अमरोहा। कॉटनवेस्ट कारोबार से करीब चार से पांच हजार मजदूर जुड़े हैं। जो कतरन की छटाई करने, ढुलाई करने, मशीन चलाने, पेस्टिंग करने आदि कामों से जुड़े हैं।
- कॉटनवेस्ट का कारोबार कच्चे माल पर निर्भर है। कच्चा माल यानी कतरन रेडीमेड कपड़ा तैयार करने वाली फैक्ट्रियों से आता है। जो बंद है। ऐसे में बिना कतरन कारखाने कैसे चलेंगे।
- रिजवान पाशा, अध्यक्ष, कतरन एसोसिएशन
- नया माल तैयार करने के लिए कतरन की जरूरत है। कतरन मिलने पर ही मशीनें चलेंगी। अगर किसी के पास कतरन है भी वह इतनी मात्रा में नहीं है कि वह एक महीने मशीन चला लें।
- अहमद हसन, कॉटनवेस्ट कारोबारी
- कॉटनवेस्ट कारोबार पहले से ही वेंटीलेटर पर चल रहा था। लॉकडाउन में कोमा में पहुंच गया है। अगर कारखाने समय से चल पड़े तो अक्तूबर के बाद ही कारोबार रफ्तार पकड़ पाएगा।
- संदीप अग्रवाल, कॉटनवेस्ट कारोबारी