हसनपुर(अमरोहा)। क्षेत्र के गांव में पैंतालीस वर्षीय कोरोना संदिग्ध व्यक्ति की मेरठ में मौत के बाद परिजन उसका शव गांव ले आए। इसकी सूचना से स्थानीय प्रशासनिक अफसरों में खलबली मच गई। पुलिस व एसडीएम गांव पहुंच गए। गांव से अंतिम संस्कार के लिए ले जाते समय शव को रास्ते में ही रोक दिया गया। तीन घंटे तक शव को सड़क किनारे ही रखा रहने दिया। रिपोर्ट निगेटिव होने पर अफसरों ने राहत की सांस ली।
बताते हैं कि कोतवाली क्षेत्र के गांव निवासी एक व्यक्ति मध्यप्रदेश में मजदूरी करता था। होली के त्योहार पर वह घर आया था। उसका बेटा गुजरात में नौकरी करता था। आठ दिन पूर्व ही बेटा भी गुजरात से आ गया। ग्रामीणों के मुताबिक पिछले चार दिनों से ग्रामीण को पैरों में दर्द व सांस लेने में तकलीफ की शिकायत हुई तो हसनपुर के निजी चिकित्सक को दिखाया। एक रात यहां एडमिट भी रहा। यहां से गुरुवार को मेरठ रेफर कर दिया। शुक्रवार सुबह मेरठ के अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। यहां कोरोना जांच के लिए उसका सैंपल भी लिया गया। शनिवार सुबह को परिजन शव को अस्पताल से गांव ले आए। घर ले जाने के बाद अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगे।
इस बीच कोरोना संदिग्ध की मौत की सूचना पर एसडीएम विजय शंकर, तहसीलदार अर्चना शर्मा व कोतवाल आरपी शर्मा टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। यहां एसडीएम ने अंतिम संस्कार को ले जाते हुए ग्रामीणों को रोक दिया और शव को रास्ते किनारे गांव के बाहर रखवा दिया। बाद में पुलिस ने शव को पीएम के लिए भेज दिया। लेकिन लोग रास्ते में ही पहुंचे थे। एसडीएम के पास कोरोना निगेटिव होने की रिपोर्ट पहुंच गई। इसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए जाने दिया। एसडीएम ने बताया कि रिपोर्ट निगेटिव है। इसलिए अंतिम संस्कार कराने के लिए कह दिया गया है।