अमरोहा। शहर के मोहल्ला अहमद नगर रजा कॉलोनी उकसी रायपुर रोड स्थित मदरसा जामिया बरकातिया नूरुल उलूम में रविवार की रात आयोजित मोहसिन-ए-कायनात कॉन्फ्रेंस व जश्न-ए-दस्तारबंदी के कार्यक्रम में मौलाना आसिफ रजा नईमी ने अपनी तकरीर में कहा कि हमें अपने बच्चों को तालीम के साथ ही तरबियत भी देनी चाहिए। क्योंकि जिन बच्चों के पास तालीम है और तरबियत नहीं है, वह बेकार है।
उन्होंने आगे कहा कि नबी-ए-करीम की उम्मत सबसे अहम है। इसका अल्लाह ने अलग मुकाम और रुतबा रखा है। उम्मत अपने सही रास्ते और जिम्मेदारी से भटक गई है, जिसके नतीजे में वह दिक्कत और परेशानियों में घिर गई है। कहा कि मुसलमानों को हालात पर गौर करते हुए संजीदगी से एक-एक कदम सोच समझकर रखना होगा। अल्लाह के बताए सही रास्ते पर चलने और सुन्नतों पर अमल करने का यह बेहतर मौका है। वरना फिर समय निकलने पर पछताना पड़ेगा।
रामपुर से तशरीफ लाए हजरत अल्लामा व मौलाना मुकीमुर्रहमान ने दीन की रस्सी को मजबूती से थामने और मोबाइल से बचने की बात कही। उन्होंने कहा कि हमें साइंस और टेक्नोलॉजी का फायदा उठाना तो चाहिए, लेकिन जिस तरह से हमारी कौम के बच्चे मोबाइल का बेजा और गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, उससे बहुत नुकसान हो रहा है। मोबाइल के बेजा इस्तेमाल से बच्चे चिड़चिड़े हो रहे हैं। उनमें अदब नाम की कोई चीज बाकी नहीं है। इसलिए हमें अपने बच्चों को मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने से रोकना चाहिए।
इससे पहले कार्यक्रम का आगाज हाफिज अब्दुल कादिर ने कुरआन पाक की तिलावत से किया। जबकि बारगाह रिसालत में नाते पाक आलम रजा निजामी ने पेश की थी।आखिर में मुजफ्फरनगर से तशरीफ लाए फरीद हसनैन मियां ने मुल्क व मिल्लत की खुशहाली और तरक्की की दुआ कराई। इस मौके पर मदरसे के मोहतमिम हाफिज़ व कारी अब्दुल कय्यूम लतीफी, मोहम्मद इरफान उल हक लतीफी, यासिर अंसारी, निजाम पहलवान, नईम अहमद आदि मौजूद रहे।