हसनपुर क्षेत्र के गांव करनखाल से होकर गुजरती बगद नदी का दृश्य।
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गजरौला नगर की फैक्ट्रियों से निकल रहे प्रदूषित पानी से बगद नदी जहरीली हो गई है। जिसका असर नदी किनारे बसे गांवों के इंडिया मार्का हैंडपंपों पर दिख रहा है। उनका पानी भी तेजी के साथ दूषित हो रहा है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए अफसरों ने नदी किनारे बसे दर्जन भर गांवों को चिन्हित किया है, जिनमें स्थित इंडिया मार्का हैंडपंप के पानी का सैंपल भरा है। इसकी स्थानीय नहीं बल्कि उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन द्वारा मामले में अगली कार्रवाई होगी।
औद्योगिक नगरी गजरौला की फैक्ट्रियों के पानी ने एक ओर जहां इलाके के लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र से निकल रही नदियों का स्वरूप भी बदल गया है। नदियों में पानी के कल कल की आवाज नहीं सुनाई देती बल्कि जहरीले केमिकलयुक्त पानी की तीक्ष्ण दुर्गंध लोगों को परेशान किए है।
बगद नदी का पानी तो मानो काला ही पड़ गया है। फैक्ट्रियों के गंदे पानी ने इस नदी के पानी का रूप बदल दिया है। साफ पानी की उम्मीद नदी को देखकर लगाना मुश्किल है। नदी के जरिए जमीन के अंदर जा रहे फैक्ट्रियों के गंदे पानी ने लोगों के दिलों की धड़कनों को बढ़ा दिया है।
इसके आस पास के गांवों के हैंडपंप भी खराब पानी उगल रहे हैं। लगातार मिल रही शिकायतों को अफसरों ने बेहद संजीदगी से लिया है। सीडीओ के निर्देश पर जिला पेयजल एवं स्वच्छता मिशन कार्यालय के अधिकारियों ने दर्जन भर गांवों को सूचीबद्ध करने के बाद उनमें लगे इंडिया मार्का हैंडपंपों से पानी के नमूने भरे हैं। जिन्हें उच्चस्तरीय जांच के लिए लखनऊ भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही अगला कदम उठाया जाएगा।