हसनपुर/ढबारसी। क्षेत्र की गोशालाओं में गोवंश की देखभाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ब्रह्माबाद की गोशाला में 212 पशु संरक्षित मिले। इनमें दो बीमार और कुछ बेहद कमजोर थे। संचालक प्रधान कविता सैनी ने बताया कि पशुओं को सुबह सात बजे भूसा-चोकर और दोपहर 12 बजे हरे चारे के साथ भूसा दिया जाता है। पेयजल के लिए तीन हौद, 10 हजार लीटर की टंकी और सबमर्सिबल है। हालांकि जरूरत के 10 के मुकाबले केवल पांच पंखे लगे हैं। संचालन का भुगतान भी समय से नहीं मिल रहा है और अभी 20 जुलाई तक का भुगतान मिला है। उन्होंने बताया कि किसी पशु में लंपी के लक्षण नहीं हैं।
ढबारसी क्षेत्र के चंदनकोटा स्थित गोशाला में 230 पशु हैं। सोमवार को तीन बीमार मिले, जबकि अधिकांश कमजोर और दयनीय स्थिति में दिखाई दिए। ग्रामीणों ने उचित देखभाल न होने का आरोप लगाया। बताया कि करीब सात दिन पहले दो बीमार पशुओं की मौत भी हुई थी। यहां भी किसी पशु में लंपी के लक्षण नहीं मिले।
उपमुख्य पशु चिकित्साधिकारी हसनपुर डॉ. चंद्रजीत सिंह ने बताया कि सभी गोशालाओं में लंपी से बचाव का टीकाकरण कराया जा चुका है। जिन पशुओं का टीकाकरण नहीं हुआ है, उन्हें पशु चिकित्सालय से वैक्सीन लेकर लगवाएं। लक्षण दिखने पर विभाग को सूचना देकर उपचार कराएं और बीमार गोवंश को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।