गजरौला। पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर गंगा के जलस्तर पर दिख रहा है। गंगा में उफान से आसपास के इलाकों में पानी पहुंचने लगा है। बिजनौर बैराज से गंगा में 96665 क्यूसेक पानी छोड़े से गंगा का जलस्तर पांच सेंटीमीटर बढ़ गया है। जिससे ओसीता जगदेवपुर के ग्रामीणों का खेतों को जाने वाले मार्ग पर इस कदर पानी भर गया है कि उनका आवागमन बंद हो गया। आस पड़ोस के गांवों के खेतों से चारा लाकर पशुओं का पेट भर रहे हैं।
बीते शनिवार को छोड़ दिया जाए तो पांच दिन से गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को बिजनौर बैराज से 96665 क्यूसेक पानी छोड़ दिए जाने से गंगा का जलस्तर 200.25 मीटर से बढ़ कर 200.30 मीटर हो गया। जलस्तर में भले ही पांच सेंटीमीटर की वृद्धि हुई, लेकिन इससे परेशानी बहुत अधिक बढ़ गई हैं। ओसीता जगदेवपुर का खेतों को जाने वाला मार्ग पानी भर जाने के कारण बंद हो गया है। जिससे ग्रामीणों के सामने चारा लाने की समस्या खड़ी हो गई हैं।
ग्रामीण मोहरका पट्टी, कांकाठेर के खेतों से घास काट कर पशुओं का पेट भरने के लिए मजबूर हैं। कुछ ग्रामीण ट्रैक्टर ट्राली लेकर हापुड़ जिले के बलुआपुर, पलवाड़ा, पसवाड़ा आदि गांवों के खेतों से चारा ला रहे हैं। टापू में बसे ग्रामीणों की दुश्वारियां भी बहुत अधिक बढ़ गई हैं। खेतों में पानी भर जाने के कारण ग्रामीणों के सामने चारे की किल्लत पैदा हो गई है।
बाढ़ खंड के जेई सुभाष चंद गहलौत का कहना है कि जल स्तर में पांच सेंटीमीटर का इजाफा हुआ है। पहाड़ों पर बारिश होती रही तो जलस्तर और भी बढ़ सकता है।
-
सड़क किनारे कर रहे शवों का दाह संस्कार
गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण तिगरी किनारे की झोपड़ियां जलमग्न हो गईं। जहां सूखा रहता था, वहां पर पानी ही पानी दिखाई दे रहा था। श्मशान घाट पर कई-कई फीट पानी भर गया है। जिसके चलते लोग कांकाठेर मार्ग किनारे की सड़क पर शवों का दाह संस्कार कर रहे हैं। मंगलवार को सड़क किनारे ही शवों के दाह संस्कार किए गए।