अमरोहा। 19 साल पहले मुठभेड़ के दौरान पुलिस पर जानलेवा हमला करने वाले बुलंदशहर के बदमाश को न्यायालय ने दस साल की सजा सुनाई है। साथ ही एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। फिलहाल, दोषी जमानत पर बाहर था। न्यायालय का फैसला आने के बाद उसे हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है।
ये घटना सैदनगली थानाक्षेत्र में 25 जनवरी 2005 की सुबह हुई थी। यहां के तत्कालीन थानाध्यक्ष अनूप सिंह राठी, कांस्टेबल जोगिंदर सिंह, नारायण दास, प्रदीप कुमार के साथ लूट के मामले की छानबीन करने उझारी गए थे। खुलासे के लिए एसओजी इंचार्ज सर्वेश कुमार शर्मा, सिपाही जयप्रकाश गुप्ता, लक्ष्य सिंह, सुंदर सिंह और राजेश तोमर भी लगे हुए थे। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि बुरावली रोड पर हुई लूट के बदमाश आम के बाग में आपस में सामान और रुपयों का बंटवारा कर रहे हैं। उनके पास तमंचे भी हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की तो उन्होंने जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी। इस दौरान पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए। बाद में पुलिस ने भी अपनी पिस्तौल और राइफल से फायर किए। इस दौरान पुलिस ने घेराबंदी करके पांच बदमाशों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान एक बदमाश ने अपना नाम प्रमोद कुमार निवासी हिसावटी थाना अनूपशहर जनपद बुलंदशहर बताया। जबकि दूसरे ने अपना नाम रहरा थानाक्षेत्र के गंगेश्वरी निवासी यामीन, तीसरे ने पौरारा गांव निवासी यासीन, चौथे ने अपना नाम हसनपुर थानाक्षेत्र के निचली झूंडी निवासी किशन और पांचवें ने अपना नाम बुरावली निवासी असगर बताया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नकदी और अवैध तमंचे बरामद किए थे। बाद में पुलिस ने सभी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया था। फिलहाल, सभी जमानत पर जेल से बाहर थे। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश त्वरित प्रथम नाजनीन बानो की अदालत में चल रही थी। बुधवार को न्यायालय ने मुकदमे में आखिरी सुनवाई की। साक्ष्यों और सबूतों के आधार पर प्रमोद कुमार को पुलिस पर जानलेवा फायरिंग करने और आयुध अधिनियम का दोषी पाया। साथ ही उसे पुलिस पर जानलेवा हमला करने के मामले में 10 साल की सजा और 500 रुपये का जुर्माना लगाया। जबकि आयुध अधिनियम में तीन साल की सजा और 500 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।