मोदी सरकार के दूसरे बजट को लेकर कहीं राहत तो कहीं निराशा दिखी। टैक्स का दायरा कुछ बढ़ा तो निम्न आय वर्ग के लोगों के चेहरे पर राहत देखी गई, वहीं कुछ जरूरी सामान पर राहत मिलने की उम्मीद थी, वो भी नहीं मिली।
मोदी सरकार ने बुधवार को अपनी सरकार का दूसरा बजट पेश किया। यह पहला मौका था जब आम बजट के संग रेल बजट भी पेश किया गया। बजट को लेकर लोगों में जबर्दस्त उत्साह था। लोग चुनावी बजट मानकर चल रहे थे। लोगों को उम्मीद थी कि बजट में काफी हद तक रियायतें दी जाएंगी।
संसद भवन में वित्त मंत्री अरुण जेटली जब अपना पिटारा खोल रहे थे तो सभी की नजर टेलीविजन के सेट पर टिकी हुई थीं। दिन भर लोग टीवी व नेट के जरिए वित्त मंत्री की घोषणाओं पर नजर टिकाए रहे। लोग इसको लेकर आंकलन लगाते रहे कि कौन सी रियायत मिली तो कहां उन्हें निराशा।
बजट पेश होने के बाद काफी देर तक चर्चा होती रही। सरकारी दफ्तरों से लेकर चाय की दुकानों तक पर आम बजट को लेकर चर्चा होती रही। इसके साथ ही बजट में नए प्रावधानों की जानकारी भी दी गई थी। आम बजट को लेकर उत्साह कायम रहा। बजट के बाद नौकरी पेशा लोगों को राहत मिली।
वहीं व्यापारी वर्ग निराश दिखा। उम्मीद के अनुसार बजट उनको नहीं दिखा। कामकाजी महिलाएं हो या फिर आम महिलाएं हर किसी की अपनी-अपनी सोच अपनी राय थी।
इसको लेकर दिन भर चर्चा होती रही।