अमरोहा। खादर क्षेत्र में हैदलपुर गंगा घाट के पास अमरोहा और बुलंदशहर के माफिया के बीच जमकर गोलियां तड़तड़ाती हैं। वर्षों से खादर की जमीनों को लेकर खूनी खेल चल रहा है, लेकिन अभी तक पुलिस एक चौकी तक नहीं खोल पाई है। तीन दिन पहले गजरौला के गुलालपुर में हुए दोहरे हत्याकांड की कड़ी भी जमीन विवाद से जुड़ रही है।
जिले में गंगा किनारे करीब पंद्रह हजार बीघा से अधिक रकबा है। नोएडा, दिल्ली, मेरठ, बुलंदशहर, मुरादाबाद, राजस्थान के लोगों ने यहां जमीनें खरीद रखी हैं। लेकिन हर साल गंगा में बाढ़ आने के बाद सभी जमीन समतल हो जाती है। लेकिन बाढ़ के खत्म होते ही जमीनों पर कब्जे को लेकर लोग आमने-सामने आ जाते हैं। एक-दूसरे की जमीनों पर कब्जा कर लेते हैं, जिस कारण लोग एक-दूसरे की जान के दुश्मन बन जाते हैं। इतना ही नहीं हैदलपुर गांव के सामने गंगा के टापू में वन विभाग की 15 से 18 सौ बीघा जमीन है, लेकिन इस पर वन विभाग का नहीं बुलंदशहर और हसनपुर क्षेत्र के माफिया का राज चलता है। हजारों बीघा गंगा की भूमि और वन विभाग की जमीन पर दबंगों का कब्जा है। पुलिस और प्रशासन की मिलीभगत से दबंग इस जमीन पर फसल उगाते हैं। फसल बुआई के समय गंगा क्षेत्र में दबंगों के बीच तनातनी रहती है। रात के अंधेरे में जमीनों पर कब्जा किया जाता है। जिसके लेकर कई बार हसनपुर और बुलंदशहर के माफिया के बीच फायरिंग हुई है। लेकिन पुलिस आज तक आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकी। माफिया में जमीन को कब्जे को लेकर वर्चस्व की लड़ाई खूनी खेल होता है, लेकिन सुरक्षा के लिहाजा से इन क्षेत्रों में आज तक एक भी पुलिस चौकी नहीं खोली जा सकी है। जिससे खादर क्षेत्र में होने वाले अपराध पर लगाम लगाई जा सके।
वारदात होने पर ही जाती है पुलिस
गंगा किनारे खादर क्षेत्र में पुलिस चौकी न होने के कारण पुलिस नहीं जाती है। जिससे अपराधी बिना किसी भय के खुलेआम घूमते हैं और वारदात को अंजाम देते हैं। पुलिस इन क्षेत्रों में तभी पहुंचती है, जब कोई वारदात होती है। जिससे अपराधियों और माफिया के हौसले बुलंद हैं। इसी के चलते वर्षों से इन क्षेत्रों में जमीन की रंजिशों में हत्याएं होती रहती हैं।