बेलवाड़ा शुगर मिल बेलगाम हो गया है। उसे न तो गन्ना विभाग के अफसरों की कार्रवाई का डर है और न ही कोर्ट के आदेशों की अवमानना की चिंता है। मिल पर किसानों का साल 2015-16 का दो करोड़ रुपये बकाया है। किसानों के सैकड़ों बार धरना प्रदर्शन और आंदोलन के बाद भी चीनी मिल भुगतान करने को तैयार नहीं है। गन्ने का भुगतान नहीं मिलने के कारण किसान आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
जिले के गन्ना किसान बेलवाड़ा, असमोली, हसनपुर, चंदनपुर, धनौरा, धामपुर, स्योहारा, अगवानपुर, रानीनांगल मिल को गन्ना आपूर्ति करते हैं। कोर्ट के आदेश यह हैं कि चीनी मिलों पर गन्ना डालने के 14वें दिन हर हाल में किसानों के बकाये का भुगतान करना चाहिए। जो भी शुगर मिल 14वें दिन गन्ने के बकाये का भुगतान नहीं करेगा, उसे मयब्याज भुगतान देने के आदेश हैं, पर बेलवाड़ा शुगर मिल को न तो गन्ना विभाग के अफसरों की कार्रवाई का डर है और न ही कोर्ट के आदेशों की अवमानना की उसे चिंता है।
14वें दिन भुगतान की बात तो दूर वह वर्षों बाद भी बकाया नहीं दे रहा है। मिल किसानों का वर्ष-2015-16 का दो करोड़ रुपये दबाए बैठा है। किसानों के सैकड़ों धरने प्रदर्शन और आंदोलन के बाद भी चीनी मिल भुगतान करने को तैयार नहीं है। बकाया गन्ना मूल्य नहीं मिलने के कारण किसान आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
किसानों का दो साल पुराना करोड़ों रुपये दबाए बैठे चीनी मिल के खिलाफ जिला प्रशासन भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। जिला प्रशासन की खामोशी के कारण ही बेलवाड़ा शुगर मिल पर भुगतान के लिए जूं नहीं रेंग रही हैं। जिसके कारण किसान आर्थिक तंगी झेलने को मजबूर हैं।
बेलवाड़ा शुगर मिल पर जनपद के गन्ना किसानों का पौने दो करोड़ रुपये बकाया है। मिल दूसरे जिले में आती है, जिसके कारण उसके खिलाफ यहां से कार्रवाई नहीं की जा सकती। वहीं के अफसरों को कार्रवाई करनी चाहिए।-विजय बहादुर सिंह जिला गन्ना अधिकारी।