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तुर्कों! लिखकर दो उग्रता नहीं करेंगे, तभी होगा महासम्मेलन

Thu, 08 Dec 2016 11:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
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Murder
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पुलिस-प्रशासन का मानना है कि हिस्ट्रीशीटर शौकत पाशा की हत्या के बाद उपजे हालातों के मद्देनजर उसके गांव में दस दिसंबर को किए जा रहे युवा महासम्मेलन से जिले की फिजा बिगड़ सकती है। इसलिए पुलिस-प्रशासन महासम्मेलन को आयोजित होने देना नहीं चाहता है। आयोजन रोकने के लिए आयोजकों के सामने तमाम शर्तें लगाई हैं। सम्मेलन में कोई विवादित बयान नहीं देगा और उग्रता नहीं करेगा ये भी लिखकर मांगा है। 
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डिडौली कोतवाली के फत्तेहपुर गांव के हिस्ट्रीशीटर शौकत पाशा की 26 नवंबर की शाम मुरादाबाद के मैनाठेेर के डींगरपुर में गोली मारकर हत्या किए जाने के बाद तुर्क समाज के लोगों में गुस्सा भड़का हुआ है। समाज के आक्रोशित लोगों ने हत्या के अगले दिन हिस्ट्रीशीटर का शव संभल चौराहा हाईवे पर रख पांच घंटे हाईवे जाम किया था।

इसमें तुर्क बहुल गांवों के लोग शामिल हुए थे। हिस्ट्रीशीटर के तीजे में शरीक हुए हजारों लोगों ने अपने तेवर दिखाए थे। तुर्कों के गांवों में कैबिनेट मंत्री महबूब अली के पुतले फूंके गए। कालिख पोतने के साथ ही होर्डिंग्स फाड़े गए। इस मामले में डिडौली कोतवाली पुलिस द्वारा कई के खिलाफ नामजद और तीन सौ से अधिक अज्ञात के खिलाफ अभियोग पंजीकृत किए जाने के बाद तुर्क समाज में रोष और बढ़ गया। 
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तुर्क बिरादरी के युवाओं का मानना है कि उनके साथ इंसाफ नहीं किया जा रहा है। राजनीतिक दबाव में पुलिस शौकत पाशा के हत्यारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है। 
हिस्ट्रीशीटर की हत्या को बिरादरी का बड़ा नुकसान बताते हुए समाज की एकजुटता पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए दस दिसंबर को हिस्ट्रीशीटर शौकत पाशा के गांव फत्तेहपुर में युवा महासम्मेलन का निर्णय लिया है।

युवा तुर्कों ने इसकी कमान अपने कंधों पर संभाल रखी है। आयोजकों ने अपने जिले के साथ ही संभल, मुरादाबाद के तुर्क बहुल गांवों और प्रमुख चौराहों पर जगह-जगह होर्डिंग्स लगाकर महासम्मेलन में पहुंचने का आह्वान किया है। फेसबुक, व्हाट्स एप, मैसेज के साथ ही अन्य माध्यमों से भी संपर्क कर रहे हैं। गांव-गांव जाकर भ्रमण करने के लिए अलग टोली लगाई गई है।

इधर हिस्ट्रीशीटर की हत्या के बाद उपजे हालात को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी फूंक फूंक कर कदम रख रहा है। पुलिस-प्रशासन का मानना है कि महासम्मेलन से जिले की फिजा बिगड़ सकती है। अमन चैन बनाए रखने के लिए महासम्मेलन को रोकने के प्रयास में है। कार्यक्रम आयोजकों के सामने कई शर्त लगाई हैं। मसलन यह लिखकर मांगा है कि इसमें कितनी भीड़ पहुंचेगी, कोई विवादित बयान नहीं देगा। इसके अलावा यह भी दबाव बनाया जा रहा है कि ताजा हालात सही नहीं है। बाद में महासम्मेलन आयोजित कर लें।
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