बावनखेड़ी की खलनायिका शबनम और उसके प्रेमी सलीम की फांसी की सजा मुकर्रर हुए आज दस साल पूरे हो गए। 15 जुलाई 2010 को जनपद न्यायाधीश अमरोहा ने परिवार के सात लोगों की हत्या के मामले में शबनम और सलीम को फांसी की सजा सुनाई थी।
लेकिन अभी भी फंदे को शबनम-सलीम की गर्दन का इंतजार है। सुप्रीम कोर्ट से भी दोनों को कोई राहत नहीं मिली है। दोनों की दया याचिका राष्ट्रपति के पास है। फिलहाल शबनम बरेली तो सलीम आगरा जेल में बंद है।
शबनम का नाम लेते ही गांववालों को खौफनाक रात की याद आ जाती है, जिसमें गांव के मास्टर शौकत अली के हंसते खेलते परिवार मौत की नींद सुला दिया गया। एक के बाद एक परिवार के सात सदस्यों को कुल्हाड़ी से वार कर मौत के घाट उतार दिया गया था। इस घटना को अंजाम किसी और नहीं बल्कि मास्टर शौकत की शिक्षामित्र बेटी शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर दिया था।
हसनपुर कस्बे से सटे छोटे से गांव बावनखेड़ी की शिक्षामित्र शबनम ने 14/15 अप्रैल 2008 की रात को प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने पिता मास्टर शौकत, मां हाशमी, भाई अनीस और राशिद, भाभी अंजुम और फुफेरी बहन राबिया का कुल्हाड़ी से वार कर कत्ल कर दिया था। भतीजे अर्श का गला घोंट दिया था। इस मामले अमरोहा कोट में दो साल तीन महीने तक सुनवाई चली।
आखिरकार 15 जुलाई 2010 को जिला जज एसएए हुसैनी ने शबनम और सलीम को तब तक फांसी के फंदे पर लटकाया जाए तब तक उनका दम न निकल जाए का फैसला सुनाया। फैसले को दस साल हो गए। लेकिन फांसी के फंदे को दोनों की गर्दन का इंतजार है।
कातिल रात की गवाही देती हैं सात कब्रें
अमरोहा। 14/15 अप्रैल 2008 की कातिल रात की गवाही मास्टर शौकत के घर के परिसर में बनी सात कब्रें में गवाही देती हैं। हत्या के बाद शबनम के पिता मास्टर शौकत, मां हाशमी, भाई अनीस और राशिद, भाभी अंजुम, भतीजे अर्श और फुफेरी बहन राबिया का शव परिसर में ही दफन किया गया था।
ये साक्ष्य बने थे अहम
शबनम का बेटा, जिससे उसके सलीम के साथ रिश्तों पर लगी मुहर
सलीम से बरामद कुल्हाड़ी
खून से सने दोनों के कपड़े
तीन सिम और मोबाइल, जिसपर दोनों ने हत्या की रात बात की थी
- सर्विलांस की डिटेल
- शबनम से बरामद दवा का खाली रैपर और फोरेंसिक रिपोर्ट
ये गवाह बने थे अहम
- शबनम की भाभी अंजुम के पिता लाल मोहम्मद, जिन्होंने सलीम और शबनम के बीच रिश्तों की गवाही दी थी।
- हसनपुर ब्लाक प्रमुख महेंद्र, जिनके पास गिरफ्तारी से पहले सलीम गया था और उसने अपना गुनाह कबूला था।
- सलीम और शबनम ने भी एक दूसरे पर कत्ल के आरोप लगाए थे।
कत्ल से सजा तक की कुछ खास बातें
- 100 तारीखों तक चली जिरह
- 29 गवाहों ने दिए थे शबनम-सलीम के खिलाफ बयान
- 27 महीने तक चली थी केस की सुनवाई
- 14 जुलाई 2010 शबनम और सलीम दोषी करार दिए गए
- 15 जुलाई 2010 को दोनों को सुनाई गई फांसी की सजा
- 29 सेेकेंड में जिला जज एसएए हुसैनी ने सुनाई थी फांसी की सजा
- 29 लोगों की हुई गवाही पर सुनाया था फैसला
- 649 सवाल किए गए थे गवाहों से
- 160 पन्नों में दर्ज है सजा की दास्तान
- 03 जिला जजों ने की थी सुनवाई