अमरोहा। जीवित किशोरी को मृत दर्शाकर निर्दोष परिजनों को ऑनर किलिंग के झूठे आरोप में जेल भेजने वाले षड्यंत्रकारी छह और पुलिस कर्मियों न्यायालय से राहत नहीं मिली है। पूर्व विवेचक सहित छह पुलिस कर्मियों की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद जिला जज ने उसे खारिज कर दिया है। अब तक नौ आरोपी पुलिस कर्मियों जमानत खारिज हो चुकी है। जबकि शेष तीन आरोपियों ने जमानत के लिए आवेदन नहीं किया है। इन सभी आरोपी पुलिस कर्मियों पर षड्यंत्र रचना, झूठे और गंभीर अपराध के लिए कूटरचित साक्ष्य गढ़ना, किसी को दस दिन से अधिक गलत तरीके से अभिरक्षा में रखने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता कुलदीप चौधरी ने बताया कि आदमपुर थानाक्षेत्र के एक गांव निवासी किसान की बेटी छह फरवरी 2019 को खेत से गायब हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने किशोरी की हत्या दर्शाकर 29 दिसंबर 2019 को उसके किसान पिता, भाई और एक रिश्तेदार को ऑनर किलिंग के झूठे मुकदमे में जेल भेजे दिया था। पुलिस की लापरवाही के कारण निर्दोष होते हुए भी किशोरी के पिता को 11, भाई को नौ और रिश्तेदार को 15 महीने जेल में गुजारने पड़े थे। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर तत्कालीन इंस्पेक्टर सहित ग्यारह पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस मामले आरोपी इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा की अग्रिम जमानत बारह नवंबर को खारिज हो गई थी। चौबीस नवंबर को महिला कांस्टेबल अपेक्षा तोमर और निधि की जमानत याचिका भी खारिज हो गई थी। इसके बाद पूर्व विवेचक दरोगा आरिफ, दरोगा विनोद कुमार त्यागी, दरोगा राकेश, सिपाही कृष्णवीर सिंह, अनिरुद्ध सिंह, दीपक ने भी जिला जज की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए बुधवार को अदालत ने सभी की जमानत याचिका खारिज को कर दिया है।