प्रदूषण की शिकायत करने वाले स्थानीय लोगों का कहना है जब ‘साहब ने पानी पीकर ही फैक्ट्रियों को क्लीन चिट दे दी है इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि जांच कैसी होगी। स्थानीय लोगों का जुबिलेंट और इन्सिलको फैक्ट्री से छोड़े जाने वाले गंदे पानी से बगद नदी में प्रदूषण हो रहा है।
इससे क्षेत्र के कुमराला, ख्यालीपुर, शहबाजपुर, खेरकी, चाकी खेड़ा, खाईखेड़ा, कसेरुआ, चौहड़पुर, सतेता समेत तमाम गांव प्रभावित हैं। गांवों के हैंडपंपों का गंदा पानी पीने से लोग विभिन्न बीमारियों की चपेट में हैं। वहीं, नदी के तटवर्ती गांवों में किसानों की फसलों पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। इसको लेकर ग्रामीण और कई संगठन नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रदर्शन करते रहे हैं।
ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए मंगलवार को उप जिलाधिकारी मंडी धनौरा आजाद भगत सिंह सोमवार को प्रदूषण अधिकारी जगदीश चंद्र वर्मा के साथ जुबिलेंट और इन्सिलकोे फैक्ट्री पहुंचकर जांच की। जुबिलेंट फैक्ट्री से निकलने वाली मैली के बारे में उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से पूछताछ की। इसके बाद कंपनी के साइट मैनेजर अनुज भाटी को साथ लेकर फैक्ट्री के आसपास के क्षेत्र का भ्रमण किया और नदी में बह रहे फैक्ट्री के जहरीले पानी के खेतों में पहुंचने पर नाराजगी जाहिर की।
उन्होंने फैक्टरी के पास लगे सरकारी हैंडपंप का पानी मंगवाकर पिया और क्लीन चिट दे दी। प्रदूषण अधिकारी जगदीश चंद्र वर्मा से फैक्ट्री की प्रदूषण की रिपोर्ट के बारे में जानकारी की। जिसे प्रदूषण अधिकारी ने ठीक-ठाक बताया।
इसके बाद एसडीएम इन्सिलको कंपनी पहुंचे और कंपनी के अधिकारियों को बुलाकर पूछताछ की। कंपनी के संबंधित अधिकारी अनुराग ने एसडीएम को बताया कि कंपनी प्रतिदिन तीन लाख अस्सी हजार लीटर पानी नदी में छोड़ती है। इसकी परमीशन कोर्ट से ली गई है।
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औद्योगिक नगरी गजरौला की जुबिलेंट कंपनी और इन्सिलको से हो रहे प्रदूषण की शिकायत पर मंगलवार को जांच पड़ताल की गई, कंपनी के अधिकारियों को तलब कर पूछताछ की गई, इन्सिलको कंपनी को करीब तीन लाख से अधिक लीटर पानी छोड़ने की अनुमति मिली हुई है। हैंडपंप में पानी भी विषैला नहीं पाया गया, फिलहाल सबकुछ ठीक ठाक पाया गया है, फिर भी जांच अभी जारी है।
-आजाद भगत सिंह, एसडीएम, मंडी धनौरा।
पिछले दिनों जिन गांव के पानी के सैंपल लिए गए थे, उनकी रिपोर्ट आ गई है। 120 फीट से नीचे का पानी ठीक पाया गया है। जुबिलेंट और इन्सिलको कंपनी से निकलने वाले गंदे पानी से क्षेत्र में कोई प्रदूषण नहीं हो रहा है। इन्सिलको चार-पांच दिन से बंद भी चल रही है। सबसे अधिक प्रदूषण कौशांबी पेपर मिल से हो रहा था वह भी बंद हो चुकी है।
जगदीश चंद्र वर्मा, प्रदूषण अधिकारी, गजरौला।