इस पर किसान ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता फोरम ने बैटरी कंपनी व विक्रेता को सेवा में कमी का दोषी पाया और किसान की दोनों बैटरी बदलने या मूल रकम छह प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने के आदेश दिए हैं। विक्रेता को मानसिक आर्थिक क्षति व वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये भी देने होंगे। डिडौली कोतवाली क्षेत्र के सहसपुर अलीनगर में किसान सहबाज अख्तर ने 22 मई 2018 को हरियाणा से संचालित कंपनी की दो बैटरी 34 हजार रुपये में खरीदी थीं, जिसका वारंटी कार्ड व अन्य प्रपत्र उनके पास है। जोया के बैटरी विक्रेता ने दोनों बैटरियों की पांच साल की वारंटी दी थी, लेकिन दोनों कुछ दिन बाद ही खराब हो गईं।
किसान ने 15 जुलाई 2020 को इसकी शिकायत बैटरी विक्रेता से की तो उसने दोनों बैटरी को कंपनी भेजकर बदलवाने की बात कही थी, लेकिन उसने 15 दिन बाद ही दोनों बैटरी बिना ठीक कराए वापस कर दीं।
इसके बाद 20 मार्च 2021 को किसान दोनों बेटियों को लेकर दुकान पर पहुंचा तो विक्रेता ने बदलने से मना कर दिया और वारंटी खत्म होने की बात कही। इसके बाद लॉकडाउन लग गया। किसान ने बैटरी कंपनी और विक्रेता को नोटिस जारी किया तो भी कोई जवाब नहीं दिया। लिहाजा, उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली। उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष और महिला सदस्य ने बैटरी कंपनी व विक्रेता को तलब कर लिया।
छह प्रतिशत ब्याज के साथ चुकानी होगी रकम
दोनों पक्षों को सुनने के बाद उपभोक्ता फोरम ने बैटरी कंपनी और विक्रेता को किसान की समस्या का समाधान न करके सेवा में कमी का दोषी पाया। साथ ही इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन माना। इसके बाद उपभोक्ता फोरम ने स्पष्ट कहा कि किसान बैटरी को बदलकर नए पाने या उसकी धनराशि व क्षतिपूर्ति पाने का पूरा अधिकारी है। लिहाजा उपभोक्ता फोरम ने बैटरी कंपनी व विक्रेता पर बैटरी बदलकर देने या उसकी मूल राशि 34 हजार रुपये छह प्रतिशत ब्याज की दर से किसान को देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मानसिक, आर्थिक क्षति व वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये अदा करने को कहा है। यह धनराशि भी छह प्रतिशत ब्याज के साथ दी जाएगी।