शहर के सभी मोहल्लों के इमामबाड़ों में मोहर्रम की तैयारियां शुरू हो गई हैं। खराब रास्तों की मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है। गड्ढों वाले रास्तों पर मरम्मत का काम लगभग पूरा हो गया है।
मोहर्रम का आगाज होने वाला है। इसमें इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में हर वर्ष मातमी जुलूस निकाले जाते हैं। शिया समाज तैयारी में जुटा है। चांद दिखने के बाद इमामबाड़ों में मजलिस का आयोजन किया जाता है। गम के माह की शुरुआत चांद देख कर हो जाती है। इसके बाद सभी अजाखानों में हुसैनी बाजा बजा कर ऐलान के बाद मोहर्रम शुरू हो जाएगा।
शहर में अपनी रिवायत के अनुसार तीन मोहर्रम से पैगंबरे मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 71 साथियों की शहादत की याद में मनाए जाने वाला मोहर्रम में मातमी जुलूस निकलेंगे, जो पूरे शहर में गश्त करते हैं। वहीं, इमामबाड़ों और घरों में फर्श-ए-अजा बिछा दी जाएगी। मजलिस-मातम का सिलसिला शुरू हो जाएगा। शिया समाज में मोहर्रम का चांद देखने के बाद खुद सोगवार (गम) में डूब जाते हैं।
मोहर्रम की तैयारी मुस्लिम समुदाय के लोग एक सप्ताह पहले से कर रहे हैं। घरों में रंगाई-पुताई के अलावा इमामबाड़ों को तैयार किया जा रहा है। चांद दिखते ही इमामबाड़ों में शबीहे अलम, ताबूत, ताजिया सजा दिए जाएंगे। इसके बाद फर्श-ए-अजा बिछाकर इमाम हुसैन की मजलिस शुरू होंगी। नियाज नजर का सिलसिला बा दस्तूर चलता रहेगा।