गजरौला। साहित्यिक चेतना को समर्पित मधुरम संस्था के लोकार्पण पर काव्य गोष्ठी में देश के ख्यातिप्राप्त कवि एवं कवयित्रियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर वाह वाही लूटी। इस दौरान संस्था की अध्यक्ष कवयित्री डॉ. मधु चतुर्वेदी ने कहा कि कविता समाज का दर्पण है। जिससे समाज को सीख मिलती है।
हाईवे किनारे एक होटल में रविवार को काव्य गोष्ठी का शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि हिंदी अकादमी दिल्ली के उपसचिव ऋषि कुमार शर्मा व विशिष्ट अतिथि वैंक्टेश्वरा विश्वविद्यालय के प्रति कुलाधिपति डाॅ.राजीव त्यागी ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जलाकर किया। इसके बाद कवयित्री डाॅ. भावना तिवारी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कवयित्री डॉ. सोनरूपा विशाल ने मां की महिमा का बखान करते हुए कहा-शाम सी नम रातों सी भीनी भोर सी है उजियारी मां, मुझमें बस थोड़ी सी मैं हूं, मुझमें बाकी सारी मां। डाॅ. मधु चतुर्वेदी ने कहा जीवन खुली किताब है मेरा पढ़ना तो आसान बहुत है, किंतु समझ पाओगे क्या तुम, अर्थ अनर्थ लगा मत लेना। नोएडा से आईं नेहा वैद ने कहा हमने तो घर बुलाया आपको, आप तो मकान देखने लगे। नोएडा से ही आईं डाॅ. भावना तिवारी ने सुनाया तन यहां पड़ा मन वहां पड़ा कैसा संबंध है, तुम हां न कहो, मैं न कहूं, कैसा अनुबंध हमारा है।
गाजियाबाद से आए मधुरम के राष्ट्रीय महासचिव चेतन आनंद ने कहा कि बड़ी ताजा हवाएं हैं हमेशा साथ में रखना, ये मौसम की अदाएं हैं हमेशा साथ में रखना। कवयित्री रेखा रानी ने कहा जिनकी छाया में पला यह बचपन नादान, उनकी महिमा का करूं, मैं कितना गुणगान। डॉ. यतेंद्र कटारिया ने कहा कि राम हैं जीवन हमारे, राम प्राणाधार हैं, राम हैं कर्ता विधाता, राम पालनहार हैं। युवा कवि चेतन रामकिशन देव ने कहा कितना बदलोगे कितना झुठलाओगे दर्पण से कैसे तस्वीर छुपाओगे, तुमको कुदरत ने बख्शी है नरमाई फिर तुम कैसे पत्थर दिल बन जाओगे। डॉ.पुष्पा जोशी, डॉ.वीणा मित्तल ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।