सरकार की ओर से गाेवंशीय पशुओं को संरक्षित कर उनकी उचित देखभाल करने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जिले की स्थिति काफी चौंकाने वाली है। बछरायूं की गोशाला में चार पशु अनदेखी की भेंट चढ़ गए, तो अन्य गोशालाओं में भी पशु ठंड में तड़प रहे हैं। अमरोहा, हसनपुर, नौगांवा क्षेत्र में बनी गोशाला में कई-कई पशु बीमार हालत में हैं।
वहीं, उन्हें ठंड से बचाने के पुख्ता इंतजाम भी नहीं हैं। उन्हें खाने में सूखा भूसा दिया जा रहा है, तो काऊ कोट भी समुचित व्यवस्था नहीं है। बृहस्पतिवार को गोशालाओं की पड़ताल की गई तो हालात काफी खराब हालत में मिले। जिले में 24 गोशालाएं हैं। इनमें करीब साढ़े तीन हजार गोवंशीय पशु संरक्षित हैं। लेकिन, सर्दी के मौसम में उन्हें बचाने के लिए किए गए इंतजाम नाकाफी नजर आ रहे हैं। कहने को उनके ऊपर तिरपाल तो लगा है, लेकिन नीचे पुआल या गन्ने की सूखी पत्ती आदि की कोई व्यवस्था नहीं है। अधिकांश जगह पर पशुओं के बैठने के लिए ईंट बिछी हैं, लेकिन धुलाई के चलते वहां गीला रहता है। हालांकि, कुछ जगह उन्हें ठंड से बचाने के लिए अलाव की व्यवस्था भी है, लेकिन उससे असर कम ही रहता है।
अमरोहा की गोशाला में तीन पशु मिले बीमार: नगर क्षेत्र में कांठ रोड पर कान्हा गोशाला है। यहां पर करीब 159 गाेवंशीय पशु संरक्षित हैं। बृहस्पतिवार दोपहर एक बजे यहां की पड़ताल की गई तो तीन पशु बीमार हालत में मिले। हालांकि, चिकित्सक उनका इलाज कर रहे थे, लेकिन बताया जा रहा है ठंड लगने से वह बीमार हुए हैं। जबकि, अन्य कई पशु काफी कमजोर हैं। दोपहर में उनके आगे खाने के लिए सूखा भूसा पड़ा था। जबकि, नीचे ठंड से बचाव के लिए न तो पुआल थी और न ही गन्ने की सूखी पत्ती। उधर, नौगांवा सादात की फरीदपुर इम्मा की गोशाला में 101 पशु संरक्षित मिले। जबकि, यहां 90 की ही क्षमता है। यहां भी एक पशु बीमार हालत मिला। जबकि, अन्य पशु काफी कमजोर हैं।
अव्यवस्था के बीच दम तोड़ रहे पशु
हसनपुर/आदमपुर/ढबारसी। गोशालाओं में अवस्थाओं का बोलबाला है। क्षेत्र के गांव दढि़याल में स्थित गोशाला की पड़ताल की गई तो दोपहर 12 बजे एक गोवंशी पशु मृत अवस्था में मिला। जिसे दफनाने की तैयारी की जा रही थी। इसके अलावा गोशाला में अन्य पशुओं की शारीरिक रूप से बहुत कमजोर मिले। पशुओं को सूखा भूसा खिलाया जा रहा था। सर्दी से बचाव के लिए काऊकोट भी नहीं थे। वहीं, नंदी बिहार गोशाला में कर्मचारियों ने अंदर घुसने नहीं दिया। बताया जा रहा है कि यहां पर गोवंशीय पशुओं की स्थिति ठीक नहीं है। सांथलपुर गोशाला में करीब 375 पशु मिले। जिन पर सर्दी बचने के काऊ कोट नहीं मिला। केवल टीन शेड में हवा रोकने के लिए तिरपाल लगाए गए हैं। उधर, ब्रह्माबाद गोशाला में 240 पशु हैं। जबकि 218 पशु ही पंजीकृत है। इस गोशाला में 224 पशुओं की क्षमता है। गोशाला की चाहरदीवारी ना होने की वजह गोशाला के संचालन में भी परेशानी आ रही है। इनमें केवल 218 पशुओं पर काऊ कोट हैं, शेष पशुओं पर काऊ कोट नहीं है। संवाद
क्षमता से अधिक पशु होने से भी अव्यवस्था
मंडी धनौरा। नगर व ग्रामीण क्षेत्र की गोशाला में क्षमता से अधिक गोवंशीय पशुओं के आश्रय पाने के कारण गोशालाओं की हालत खराब हो रही है। नगर की गोशाला में सर्दी से बचाव के लिए करीब 10 गोवंशीय पशुओं के पास काऊ काेट नहीं थे। कान्हा गोशाला में क्षमता से अधिक गोवंशीय पशु आश्रय पा रहे हैं। बछरायूं की गोशाला की हालत भी खराब है। वहां गोवंशीय पशुओं को हरा चारा सिर्फ खानापूर्ति के लिए ही दिया जा रहा था। संवाद
सर्दी को देखते हुए जिले की गोशालाओं में संरक्षित पशुओं को विशेष ध्यान रखने के लिए नगरपालिका, नगर पंचायत व पशु पालन विभाग के अधिकारियाें को निर्देशित किया गया है। यदि किसी गोशाला में पशु बीमार पड़ रहे हैं तो संबंधित अधिकारियाें के वहां जांच पड़ताल करने के लिए भेजा जाएगा। लगातार गोशालाओं के प्रति अधिकारी सजगता बरत रहे हैं।
- निधि गुप्ता वत्स, डीएम