विदेशी अमरोहवी आम का स्वाद इस बार ज्यादा नहीं चख पाए। एक्सपोर्टर उनकी डिमांड को पूरा नहीं कर सके। 200 टन की बजाय 70 से 80 टन तक ही आम एक्सपोर्ट किया जा सका। मौसम ने फसल के साथ जो दगाबाजी की, उसकी वजह से विदेशियों की मांग को निर्यातक पूरा नहीं कर पाए। शुरूआत में जो आम एक्सपोर्ट हुआ, बस वही रह गया। बाद में बाहर जाने लायक उसकी स्थिति नहीं रही।
जिले में आम की फसल बंपर पैदा हुई, जिसको देखकर उत्पादकों के चेहरे खिले हुए थे, लेकिन बदलती गई मौसम की फिजा, उसकी दुश्मन बन गई। जहां उम्मीद थी कि इस बार विदेशियों से आम बेचकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकेगा, लेकिन बदलते गए मौसम की उम्मीद को तोड़ डाला। एक्सपोर्टर की बात पर यकीन करें तो विदेश से 200 टन आम एक्सपोर्ट के लिए डिमांड आई थी, लेकिन उसको पूरा नहीं किया जा सका।
दशहरी, लंगड़ा, चौसा, मल्लिका आम सीजन के आरंभ व बीच में अमेरिका, इंग्लैंड, रसिया, बांग्लादेश, पाकिस्तान, आस्ट्रेलिया, जापान भेजा गया था। जो करीब 70 से 80 टन के बीच था। अब सीजन के अंतिम चरण में आम का ऊपरी छिलका खराब होने लगा, जिसको देखकर विदेशियों ने मना कर दिया। अंत में जो सप्लाई बांग्लादेश के लिए होनी थी, वह पूरी नहीं हो पाई है। लंगड़ा, चौसा का ऊपरी छिलका काला पड़ गया है। चंद घंटे में ही उसकी खूबसूरती गायब हो रही है। बारिश से आम मीठा तो हुआ, किन्तु छिलके पर कालापन आ गया।