अमरोहा। करीब आठ साल पहले एआरटीओ कार्यालय में हुए बड़े फर्जीवाड़े पर सरकारी मुहर लग गई है। जोया और गजरौला की फर्जी फर्मों के गलत नाम-पते पर पंजीकृत कराई गईं सात सौ एम्बुलेंस दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में दौड़ती पाई गई थीं। कागजों में चल रहीं इन फर्मों का पता है और न एंबुलेंसों का। ये सभी एंबुलेंस 2017 में दो फर्जी फर्मों के नाम पर रजिस्टर्ड कराई गई थीं। करीब दो साल तक चली जांच के बाद अब अप परिवहन आयुक्त ने इन सभी एंबुलेंस के पंजीयन को निरस्त करने के आदेश दिए हैं। जिसके बाद एआरटीओ ने नोटिस जारी करने की कवायद शुरू कर दी है।
सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल जग्गा ने परिवहन विभाग के अधिकारियों से फर्जी फर्म का गठन कर कूटरचित प्रपत्रों के जरिए 700 एंबुलेंस का पंजीयन करने का आरोप लगाया था। एंबुलेंस की संख्या का खुलासा एआरटीओ द्वारा आरटीआई के जवाब से हुई था। एंबुलेंस के पंजीयन पत्रावली में वाहन के पंजीकृत मालिकों द्वारा कारोबार के स्थान के पते के प्रमाण पत्र के रूप में कागजात लगाए गए, वह कूटरचित हैं। सात सौ से अधिक एंबुलेंस केवल दो फर्जी फर्मों श्री साइन एम्बुलेंस सर्विसेज निकट एआरटीओ ऑफिस अतरासी रोड और गगन त्यागी एम्बुलेंस सर्विस ग्राम तिगरिया खादर गजरौला और करीब सौ एम्बुलेंस इकबाल नगर कस्बा जोया के पते पर पंजीकृत हैं।
जबकि हकीकत में उन नाम-पते पर कोई एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं है। नाम-पते पूरी तरह फर्जी हैं। इतना ही नहीं इन पतों पर कोई भी एंबुलेंस सर्विस देने वाली संस्था कार्यरत नहीं है। एंबुलेंस के अधिकतर मालिक उत्तर प्रदेश राज्य से बाहर दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा के मूल निवासी हैं। अस्थाई पते के कॉलम में दोनों फर्मों और इकबाल नगर जोया के फर्जी पते दर्ज किए गए थे। इतना ही नहीं इतनी बड़ी संख्या में फर्म के नाम पंजीकृत एंबुलेंस की स्थानीय लोगों को भी जानकारी नहीं है।
फर्म के पंजीयन का प्रमाण पत्र भी नहीं
अनिल कुमार जग्गा का आरोप था कि प्रपत्र केवल पार्टनरशिप डीड को फर्म निबंधक के कार्यालय में पंजीकृत कराए जाने का प्रमाण पत्र का भाग एक है जो किसी फर्म के पंजीयन का फार्म नहीं होता है। फर्म के पंजीयन का प्रमाण पत्र, राज्य वाणिज्य और व्यापार कर विभाग या केंद्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क विभाग अथवा परिवहन विभाग द्वारा किसी परिवहन सेवा के रूप में कार्य करने के लिए जारी किया जाता है। किसी भी संस्था द्वारा फॉर्म के स्थापना प्रमाण पत्र स्वरूप कोई भी प्रपत्र जारी नहीं किया गया था।
एआरटीओ ने जारी किया था नोटिस, जवाब नहीं
वर्ष 2021 में प्रकरण संज्ञान में आने के बाद तत्कालीन एआरटीओ प्रशासन उद्भव त्रिपाठी ने फर्मों के दोनों मालिकों को नोटिस जारी किया, लेकिन फर्म या उसके साझेदारों की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया था।
कोरोना के दौर में ऐसे खुला मामला
शिकायतकर्ता अनिल कुमार जग्गा ने बताया कि वर्ष 2020 में कोरोना के दौर में एंबुलेंस नहीं मिल पा रही थी। लोगों को आसान तरीके से एंबुलेंस उपलब्ध हो जाए इसके बारे में एआरटीओ कार्यालय से एंबुलेंस के संदर्भ में आरटीआई से जानकारी मांगी गई तो 700 एंबुलेंस के पंजीयन का मामला सामने आया। उन्होंने बताया कि उस वक्त एंबुलेंस जिले में उपलब्ध नहीं थी। इसमें 500 एंबुलेंस जिले की दो फर्म के नाम पते पर दर्ज मिलीं। जबकि स्थलीय सत्यापन के दौरान कोई फर्म संचालित नहीं मिली। जिसके बाद उसे आधार बना कर शिकायत की गई।
फर्जी फर्म के पते पर एंबुलेंस का पंजीयन
दिल्ली और हरियाणा के एंबुलेंस संचालकों ने जिले को फर्जीवाड़े का ठिकाना बनाया है। फर्जी नाम और पते पर एंबुलेंस का पंजीयन होने से जिले के लोगों को मेडिकल सेवा नहीं मिलती है। जबकि ये दिल्ली और एनसीआर में अवैध तरीके से संचालित होती हैं। एंबुलेंस के मालिक अवैध तरीके से रोजाना की लाखों की काली कमाई करते हैं।
इसलिए कराया पंजीयन
दिल्ली में एंबुलेंस संचालन के लिए सरकार ने नीति बनाई है। जिसके चलते पैरामेडिकल स्टाफ रखना जरूरी है। जबकि उत्तर प्रदेश में एंबुलेंस के नाम पर ही पंजीयन हो जाता है और टैक्स में छूट अलग से मिलती है।
फर्जीवाड़े में कितने अधिकारी-कर्मचारी शामिल, फंस सकती है गर्दन
बताया जा रहा है कि इन एंबुलेंस का पंजीयन वर्ष 2017 में कराया गया था। इस खेल में कितने अधिकारी-कर्मचारी शामिल होंगे, ये तो जांच का विषय है। लेकिन, हर साल एंबुलेंस की फिटनेस या अन्य प्रक्रिया होती हैं तो जिम्मेदारों को कार्रवाई क्यों नहीं की।
दो फर्मों से जुड़ी 700 एंबुलेंस के पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। दोनों फर्म संचालक और एंबुलेंस संचालकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इस पूरे फर्जीवाड़े में तत्कालीन कर्मचारी-अधिकारी भी शामिल रहे हैं। उनके खिलाफ भी कार्रवाई कराई जाएगी।-महेश कुमार शर्मा, एआरटीओ अमरोहा