पांच सितंबर को साबित हुआ था आरोप
गिरफ्तारी के बाद से ही विशाल जेल में बंद था। लगातार प्रयास करने के बाद भी उसे जमानत नहीं मिल सकी थी। ये मुकदमा एडीजे तृतीय संजयवीर सिंह की अदालत में विचाराधीन चल रहा था। 5 सितंबर 2022 को न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन बंसल ने पैरवी की। इसी दिन साक्ष्य और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी दुकानदार विशाल को दोषी करार दिया। जबकि बुधवार सुनवाई करते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही न्यायालय ने 35 हजार का जुर्माना भी लगाया है।
मजाक बनाने पर मार डाला
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन बंसल ने बताया कि दोषी दुकानदार विशाल ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि मोहल्ले के कुछ बच्चे उसका मजाक बनाते थे। पांच सितंबर 2019 को भी कुछ बच्चों ने मजाक बनाया था लेकिन वह कुछ नहीं बोला। दोपहर के समय राहुल दुकान पर आया। इस दौरान भी राहुल मजाक बनाने लगा। विशाल ने राहुल को डांटा तो उसने गाली गलौज कर दी।
विशाल ने बताया कि वह राहुल को पकड़ कर अपनी परचून की दुकान के पीछे ले गया और जोर से धक्का दे दिया। इस दौरान दीवार में सिर लगने के कारण राहुल को चोट लग गई। इस पर विशाल ने सोचा कि राहुल के परिवार वाले उसके साथ झगड़ा करेंगे। इसलिए विशाल ने राहुल को मारने का प्लान बनाया और उसके मुंह में कपड़ा ठूंस कर पहले पेचकस घोंपा और फिर चाकू व कैची से गोदकर उसकी हत्या कर दी।
सजा पर उदारता न बरती जाए
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन बंसल ने सुनवाई के दौरान अपना तर्क रखा कि आरोपी विशाल ने एक अबोध सात वर्षीय बालक का अपहरण कर उसकी पेचकस, चाकू और कैंची से गोदकर हत्या की है। हत्या के साक्ष्य मिटाने के आशय से उसके शव को अपने गोदाम में छिपाया। इसलिए सजा पर उदारता न बरती जाए और कठोर से कठोर सजा दी जाए।