अमरोहा। प्रदेश सरकार ने एक जिला-एक व्यंजन योजना के तहत अमरोहा के प्रसिद्ध आम पना को आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया है। इस संबंध में बुधवार को शासनादेश जारी कर दिया गया।
इससे जिले के आम उत्पादकों और कच्चे आम से जुड़े छोटे कारोबारियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। इससे न केवल स्थानीय उत्पाद को पहचान मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
अमरोहा और हसनपुर तहसील देशभर में अपनी फल पट्टी के लिए मशहूर हैं। यहां करीब 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में आम के बाग फैले हुए हैं, जिनमें 24 से अधिक किस्में पाई जाती हैं। आम के सीजन में बड़ी मात्रा में कच्चे आम का उत्पादन होता है, जिसका उपयोग अब तक सीमित रूप से अचार, अमचूर और चटनी बनाने में किया जाता रहा है।
आम पना को योजना में शामिल किए जाने से अब कच्चे आम का बेहतर और बड़े स्तर पर उपयोग संभव हो सकेगा। जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि आंधी-तूफान में पेड़ों से गिरने वाला कच्चा आम अक्सर खराब हो जाता था, लेकिन अब उसे भी आम पना बनाने में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे किसानों को नुकसान कम होगा और अतिरिक्त आय का स्रोत बनेगा।
गर्मी के मौसम में आम पना न केवल स्वादिष्ट पेय है, बल्कि लू से बचाव में भी बेहद लाभकारी माना जाता है। स्थानीय स्तर पर पहले से ही कुछ ठेलों और छोटे दुकानदारों द्वारा आम पना तैयार कर बेचा जाता है। वहीं हसनपुर के गजरौला-संभल बाइपास पर कच्चे आम के सीजन में अचार और चटनी के कई स्टॉल भी लगते हैं, जहां के कारीगर अपनी पारंपरिक कला के लिए जाने जाते हैं।
अब इस निर्णय के बाद इन छोटे कारोबारों को बड़े स्तर पर विस्तार मिलने की उम्मीद है। मालूम रहे कि सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। शासनादेश जारी होने के बाद अब जिले में आम पना को ब्रांडिंग और विपणन के जरिए नई पहचान दिलाने की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। संवाद