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Amroha: हाईवे जाम करने में एमएलसी ढिल्लो समेत 15 आरोपी बरी, 2007 के केस में तीन घंटे चली सुनवाई

Sat, 11 Nov 2023 11:38 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अमरोहा

सार

एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लो समेत सभी लोगों ने राष्ट्रीय लोक दल में रहते वर्ष 2007 में हरित प्रदेश बनाने की मांग को लेकर नेशनल हाईवे जाम किया था। तत्कालीन थानाध्यक्ष आईआर खान ने 18 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी।  
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कोर्ट में पेश होने के लिए जाते अमरोहा एमएलसी ढिल्लो - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सोलह साल पहले हरित प्रदेश बनाने की मांग को लेकर नेशनल हाईवे जाम करने के मामले में आरोपी एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लो, लोकदल के तत्कालीन जिला अध्यक्ष रामवीर सिंह, पूर्व विधायक हाजी हयात, वर्तमान में मुरादाबाद दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति के अध्यक्ष प्रदीप चौधरी, उनके भाई प्रणदीप चौधरी, सपा के पूर्व जिला अध्यक्ष विजयपाल सैनी, मेहंदी हसन, रोमी शफात, शाहिद खेड़ी, अतुल सिंह, धर्मवीर सिंह, शफीक सैफी, नदीम अब्बास, अटल सिंह, नदीम उस्मानी समेत पंद्रह आरोपियों को एमपी-एमएलए कोर्ट ने बरी कर दिया है।

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जबकि तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है। शुक्रवार को करीब तीन घंटे तक मामले की सुनवाई चली। अदालत ने बारह पेज में अपना फैसला सुनाया। देर शाम करीब छह बजे तक सभी नेता और उनके अधिवक्ता कचहरी में डटे रहे। इन सभी लोगों ने राष्ट्रीय लोक दल में रहते वर्ष 2007 में हरित प्रदेश बनाने की मांग को लेकर नेशनल हाईवे जाम किया था।


इस दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष आईआर खान ने 18 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। अभियोजन अधिकारी सुशील सिंह ने बताया कि इस मामले में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं सिविल जज सीनियर डिवीजन ओमपाल सिंह ने साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया है।
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आरोपी पक्ष की ओर से इन अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष

शुक्रवार को कोर्ट में इस केस की आखिरी सुनवाई हुई। आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता कपिल चिकारा, मतलूब सुब्हानी, गौरव सिंह, आलोक सिंह, मुकेश कुमार व प्रदीप कुमार ने बचाव में अपना पक्ष रखा। जबकि अभियोजन पक्ष मजबूत साक्ष्य पेश नहीं कर पाया। जिसके चलते न्यायालय ने आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

25 अगस्त को न्यायिक हिरासत में रहे थे नेता जी

24 अगस्त को एमपी एमएलए कोर्ट ने इस मामले में कुर्की और गैर जमानती वारंट जारी किए थे। इसके बाद 25 अगस्त को बाद में न्यायालय के आदेश पर एमएलसी हरि सिंह ढिल्लो, रालोद नेता रामवीर सिंह, थान सिंह, अदल सिंह, नदीम अब्बास, धर्मवीर विद्यार्थी के वारंट 20-20 हजार रुपये के मुचलके पर निरस्त कराए गए थे।

जबकि मुरादाबाद दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अध्यक्ष प्रदीप चौधरी, सपा के पूर्व जिला अध्यक्ष विजयपाल सैनी और सपा नेता रोमी सफात ने जमानत कराई। सुनवाई के दौरान इन तीनों को ढाई घंटे की न्यायिक कस्टडी में रखा गया था। साथ ही बीस-बीस हजार रुपये के दो-दो जमानती व 20-20 हजार के निजी मुचलके में पाबंद किए गए थे। मामले में वारंट जारी होने के बाद 16 साल पुराना मामला सुर्खियों में आया था।

इनकी हो चुकी है मौत

भारतीय किसान यूनियन टिकैत के तत्कालीन जिलाध्यक्ष करतार सिंह, उदल सिंह और सोमपाल सिंह की मौत हो चुकी है।

साक्ष्यों का रहा अभाव

एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लो समेत सभी पंद्रह आरोपियों को सजा दिलाने में साक्ष्यों का अभाव रहा। न्यायालय ने माना कि हाईवे जाम के दौरान पब्लिक द्वारा कोई शिकायत नहीं की गई। इस दौरान कोई जनहानि या नुकसान भी नहीं हुआ। गवाह ये साबित करने में नाकाम रहे कि जाम के समय आरोपियों मौके पर थे या नहीं। न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए नामजद सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

उस समय बसपा की सरकार थी। मैं विधान परिषद का सदस्य था। राजनीतिक द्वेष भावना के साथ ये झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया था। रजबपुर में साप्ताहिक बाजार स्थल पर भारतीय किसान यूनियन की पंचायत हुआ करती थी। इस दौरान मैं किसानों के बीच पहुंच जाता था। तभी पुलिस ने मुझे वहां बैठे हुए देख लिया होगा और झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया। हमें न्यायालय से न्याय मिला है। यही उम्मीद थी।  - डाॅ. हरि सिंह ढिल्लो, एमएलसी
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