अमरोहा एक निजी अस्पताल में बंधक बने एंबुलेंस चालकों से पूछताछ करती पुलिस। अमर उजाला
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निजी चिकित्सक की लग्जरी कार से 102 एंबुलेंस टकरा गई, जिसके बाद हंगामा खड़ा हो गया। अस्पताल कर्मियों ने चालक व ईएमटी को बंधक बना लिया और फिर एंबुलेंस को डाक्टर के कर्मचारी अस्पताल में ले गए और खड़ा करा दिया। दो घंटे तक कर्मचारियों अस्पताल में कैद रहे।
अब जब ये सूचना उच्चाधिकारियों को मिली तो खलबली मच गई। मामला लखनऊ तक पहुंच गया। पुलिस ने शाम को मौके पर पहुंचकर दोनों कर्मचारियों को बंधनमुक्त कराया। दोनों पक्षों के बीच सुलह समझौते की बात चल रही थी। किसी भी पक्ष ने तहरीर नहीं दी थी।
रविवार की शाम साढ़े पांच बजे 102 एंबुलेंस कर्मी शहर में केस लेने जा रहे थे। जाम के कारण चालक पीरगढ़ वाले रास्ते से एंबुलेंस निकाल रहा था। इसी दरम्यान मोहल्ले के ही एक निजी चिकित्सक की लग्जरी गाड़ी अस्पताल के बाहर खड़ी थी। रास्ता तंग होने की वजह से एंबुलेंस चिकित्सक की गाड़ी से टकरा गई। नजर पड़ते ही अस्पताल के कर्मी मौके पर आ गए और खींचतान कर चालक व ईएमटी को उतार लिया।
अधिकारियों से बात कराने और गाड़ी को ठीक करने की जिद पर अड़ गए। दोनों कर्मचारियों को अस्पताल के अंदर ले गए। बाहर खड़ी एंबुलेंस भी अंदर कर ली और कर्मियों को बंधक बना लिया। कर्मियों को बंधक बनाने की खबर जब जिला कोआर्डिनेटर दीपक सिंह को मालूम पड़ी तो वह सन्न रह गए। मसले से उन्होंने लखनऊ स्थित अधिकारियों को खबर की। इससे खलबली मच गई।
लखनऊ से सीधे पुलिस अफसरों पर कर्मियों को मुक्त कराने के लिए फोन आने चालू हो गए। दो घंटे से अधिक देर तक सरकारी एंबुलेंसकर्मियों को बंधक बनाए रखा गया। अफसरों के हुक्म पर हरकत में आई कोतवाली पुलिस अस्पताल पहुंची। दोनों कर्मियों को मुक्त कराया। पुलिसकर्मी अस्पताल में चिकित्सक और एंबुलेंसकर्मियों से बातचीत के जरिए मसले को खत्म करने के प्रयास कर रहे थे।
वाहन टकराने के कारण विवाद हुआ था। क्षतिपूर्ति के लिए एंबुलेंस चालक को रोक लिया था, पुलिस पहुंची तबतक दोनों पक्षों में समझौता हो गया था।-ऋषिपाल कठेरिया, कोतवाल