अमरोहा। परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक में दाखिले के लिए नया नियम परेशानी का सबब बन रहा है। जिसके चलते नामांकन का लक्ष्य पूरा करना शिक्षकों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। दरअसल कक्षा एक में प्रवेश के लिए छह वर्ष की आयु पूर्ण होना जरूरी कर दिया गया है। जिसके चलते कम उम्र के बच्चों का प्रवेश नहीं हो पा रहा है।
परिषदीय स्कूलों में एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू हो गया है। इसके साथ ही स्कूलों में नामांकन प्रक्रिया के तहत बच्चों के एडमिशन लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जिले में 1266 परिषदीय स्कूलों का संचालन किया जाता है, जिसमें करीब सवा लाख बच्चे अध्ययन करते हैं। नया शैक्षिक सत्र शुरू होने के बाद बच्चों के प्रवेश एवं नामांकन संख्या बढ़ाने को शिक्षकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। लेकिन कक्षा एक में प्रवेश के लिए नया नियम शिक्षकों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। बेसिक शिक्षा निदेशक द्वारा सभी बीएसए को भेजे गए पत्र में एक अप्रैल को छह वर्ष की आयु पूरी कर चुके बच्चों का ही एडमिशन लिए जाने, जबकि इससे कम उम्र के बच्चों का प्रवेश बाल वाटिका में किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
निजी स्कूलों की भरमार के कारण परिषदीय स्कूलाें में हर साल नामांकन में कमी देखने को मिल रही थी। इस कारण शिक्षकाें को एक-एक नामांकन के लिए जोर लगाना होता था। कम नामांकन पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी जाती थी। अब नए निर्देश के बाद शिक्षकों के लिए लक्ष्य को हासिल कर पाना टेढ़ी खीर हो गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने प्री प्राइमरी स्कूल (आंगनबाड़ी) में दाखिले की न्यूनतम उम्र तीन साल और कक्षा एक में प्रवेश की न्यूनतम उम्र छह वर्ष निर्धारित की है। इस नियम के चलते छह वर्ष से कम के बच्चों के प्रवेश नहीं हो पा रहे हैं। एडमिशन कराने पहुंच रहे अभिभावकों को भी बैरंग लौटना पड़ रहा है। अगर नियमों में ढील नहीं दी गई, तो सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या में गिरावट आ जाएगी।
- मुकेश चौधरी, जिला मंत्री उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
बेसिक स्कूलों में प्रवेश के लिए नामांकन बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। शिक्षकों एवं नामांकन बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नये नियमों के तहत छह साल से कम उम्र के बच्चों का प्रवेश बाल वाटिका एवं एक अप्रैल को छह साल की आयु पूरी कर चुके बच्चे ही कक्षा एक में प्रवेश ले सकेंगे। डॉ. मोनिका, बीएसए