अमरोहा। ट्रेन से कटकर किसान की मौत के बाद बीमा कंपनी ने क्लेम देने से इन्कार कर दिया। कंपनी ने आरटीआई के तहत मांगे गए सवालों का जवाब भी नहीं दिए। इस पर किसान की पत्नी ने उपभोक्ता फोरम की शरण ली। आयोग ने बीमा कंपनी को क्लेम के तीन लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज समेत देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बीमा कंपनी पीड़िता की आर्थिक व मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के लिए 25 हजार रुपये भी देगी।
बागड़पुर इम्मा गांव की रेवा देवी के पति होमपाल सिंह ने एक बीमा कंपनी से तीन लाख रुपये की पॉलिसी कराई थी। पॉलिसी में तीन लाख रुपये का दुर्घटना बीमा का रिस्क कवर भी था। किसान की पत्नी रेवा देवी इस पॉलिसी में नॉमिनी है। इस बीच उनके पति हाेमपाल सिंह की ट्रेन से कटकर मौत हो गई। इस पर रेवा ने क्लेम के लिए आवेदन किया लेकिन बीमा कंपनी के अधिकारी टालमटोल करने लगे। इस संबंध में रेवा देवी ने बीमा कंपनी के उच्चाधिकारियों से भी क्लेम देने की मांग की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग की शरण ली।
एक माह में देनी होगी राशि
आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह और महिला सदस्य अंजू रानी दीक्षित ने बीमा कंपनी के अधिकारियों को तलब कर लिया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष रमाशंकर सिंह ने बीमा कंपनी को नौ प्रतिशत ब्याज के साथ क्लेम के तीन लाख रुपये देने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पीड़िता को मानसिक और शारीरिक क्षतिपूर्ति के लिए 15 हजार और वाद व्यय रूप में 10 हजार रुपये भी बीमा कंपनी को देने होंगे। यह धनराशि एक महीने के भीतर अदा करनी होगी।