क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन शबीना की ससुराल पलौला के बाद अब हरियाना गांव में भी मनरेगा में घोटाले का मामला सामने आया है। गांव में बिना काम किए ग्राम प्रधान के परिवार के 14 सदस्यों समेत 20 से ज्यादा लोगों पर मजदूरी लेने का आरोप है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान के पिता का भी जॉब कार्ड बना हुआ है, जिनका निधन हो चुका है।
इसके अलावा गांव में अन्य कार्यों में भी भ्रष्टाचार हुआ है। शिकायतकर्ता ने डीएम को ऐसे जॉब कार्डधारकों की सूची सौंपी है, जो बिना काम किए मजदूरी हासिल कर रहे हैं। उन्होंने डीएम से ग्राम पंचायत में हुए भ्रष्टाचार व घोटाले की जांच कराने और हड़पी गई धनराशि की रिकवरी करने की मांग की है। डीएम ने मामले की जांच डीपीआरओ को सौंप दी है।
जोया ब्लॉक क्षेत्र के हरियाना गांव निवासी शमशीर अहमद के साथ कई ग्रामीण बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव की मिली भगत से हरियाणा ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। कहा कि ग्राम पंचायत के अंतर्गत मनरेगा के कार्य में भी गोलमाल किया गया है। योजना के तहत जितने कार्य दिखाए गए हैं उनमें से 20 प्रतिशत भी कार्य भी नहीं हुए हैं।
मनरेगा मजदूरों के नाम पर रकम निकालकर सरकारी धन हड़पा जा रहा है। सभी समृद्ध, धनी व रसूखदार लोगों को मनरेगा मजदूर दर्शाकर सरकारी राशि लूटी जा रही है। आरोप है कि जिन 20 से ज्यादा लोगों को मनरेगा मजदूर दर्शाया गया है, उनमें से 14 लोग ग्राम प्रधान के परिवार के हैं। इसमें ग्राम प्रधान के सगे भाई बाबू खान, नजरुल कमर, मृतक पिता तसलीम अहमद, चाचा मुख्तार, चचेरा भाई उवैश, जुबेर आलम के जॉब कार्ड बने हैं। जबकि, यह लोग कभी फावड़ा चलाने नहीं पहुंचे। गांव के कई लोग भी ऐसे हैं जिनसे बिना कार्य कराए ही उनके खाते में पैसा डलवा कर निकलवा लिया जाता है।
आरोप है कि हरियाना ग्राम पंचायत में शौचालय निर्माण कराने में भी घोटाला हुआ है। जिन लाभार्थियों के पहले से अपने निजी शौचालय बने थे, उन्हें उनके खाते में भी रुपये डलवाए गए हैं। आरोप लगाया कि मनरेगा कार्य के दौरान दर्शाए गए 80 प्रतिशत फोटो फर्जी है। कभी कभार दो चार लोगों से काम कराया जाता है। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में हुए सभी विकास कार्य और मनरेगा की जांच कराकर गबन की गई धनराशि की रिकवरी करने की मांग की है।
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आरटीआई का नहीं दिया जवाब
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव जानकारी को छिपकर घोटाले का भंडाफोड़ नहीं होने देना चाहते हैं। इसलिए शमशीर अहमद द्वारा मांगी गई आरटीआई का भी जवाब नहीं दिया गया।
मनरेगा वेबसाइट पर भी रिकॉर्ड अधूरा
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायत में ग्राम सभा व अन्य छह समितियां की बैठक, एजेंट, प्रस्ताव पर हस्ताक्षर जाली हैं। गांव में कभी कोई मुनादी नहीं कराई जाती, खुले में बैठक या सभा कभी नहीं हुई हैं। मनरेगा वेबसाइट पर भी रिकॉर्ड अधूरा व कटा-फटा और शुद्ध नहीं है।
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प्रधान पक्ष पर पहुंच गई शिकायत की कॉपी
शमशीर अहमद बृहस्पतिवार को मामले की शिकायत करने के लिए डीएम कार्यालय पहुंचे थे। उन्होंने डीएम कार्यालय में शिकायतीपत्र देते हुए जॉब कार्डों की लिस्ट भी सौंपी थी। लेकिन, उनके घर पहुंचने से पहले ही शिकायत की कॉपी प्रधान पक्ष के पास पहुंच गई। जानकारी होने पर शिकायतकर्ता शुक्रवार को फिर से डीएम कार्यालय में शिकायत करने के लिए पहुंचा। लेकिन, डीएम के न मिलने पर वह वापस लौट गए। उन्होंने डीएम से फिर मिलकर मामले की शिकायत करने की बात कही है।
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नहीं हुई गांव में कोई खुली बैठक
शमशीर ने डीएम को दिए शिकायतीपत्र में कहा है कि गांव में विकास कार्यों को सही ढंग से नहीं किया जा रहा है। न तो गांव में कोई खुली बैठक होती है, और न ही कोई मुनादी। पंचायत की छह समितियों की बैठक के एजेंडे और पारित प्रस्तावों पर भी अधिकांश हस्ताक्षर जाली किए जाते हैं। आरोप है कि मनरेगा में भी फर्जी फोटो लगाए जाते हैं। कभी-कभी चार या पांच लोगों से कुछ घंटे कार्य कराकर पूर्ति करा दी जाती है।
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शमी की बहन की प्रधान सास से भी हो चुकी है रिकवरी
जोया ब्लॉक के गांव पलौला में भी क्रिकेटर मोहम्मद शमी की बहन की प्रधान सास गुले आयशा द्वारा अपने परिजनों व परिचितों को बिना काम किए मनरेगा मजदूरी हासिल किए जाने का मामला सामने आया था। केंद्र व राज्य सरकार ने भी मामले की रिपोर्ट तलब की थी। डीएम द्वारा कराई गई जांच में प्रधान के परिजनों व परिचितों द्वारा बिना काम किए ली गई 8.64 लाख रुपये की रिकवरी की गई थी।
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फिलहाल शिकायत की जानकारी नही है। अगर शिकायत हुई है तो जांच में सब स्पष्ट हो जाएगा। - मोहम्मद जीशान, ग्राम प्रधान
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मामले की शिकायत मिली है। जांच डीपीआरओ को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। - निधि गुप्ता वत्स, डीएम