पहाड़ों पर बारिश और बैराज से हो रहे डिस्चार्ज से तिगरी और ब्रजघाट में गंगा में उफान जारी है। इससे क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। तिगरी में गंगा खतरे के निशान से 1.55 दूर रह गई है। वहीं ब्रजघाट में तेजी से जलस्तर बढ़ रहा है। अगले चौबीस घंटे में गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है।
प्रशासन ने बाढ़ के खतरे को भांपते हुए सभी बाढ़ राहत चौकियों केे अलर्ट कर दिया है। एसडीएम, तहसीलदार को क्षेत्र का दौरा कर स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं सभी विभागों को बाढ़ से निपटने को तैयार रहना होगा। इधर, फसलों पर संकट भी है। खेतों में भरे पानी की वजह से धान की पत्तियां पीली पड़ गई हैं। वहीं खेतों से पौध भी बह गई है। इससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
सोमवार को तिगरी में गंगा का जलस्तर पांच सेेंटीमीटर बढ़ा है। जलस्तर 200.40 से बढ़कर 200.45 मीटर पहुंच गया है। यहां गंगा खतरे के निशान से 1.55 मीटर दूर रह गई है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से तिगरी के आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ खतरा मंडराने लगा है। लोगों में दहशत व्याप्त है। क्योंकि अगले चौबीस घंटे में गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है। इसकी आशंका जताई गई है।
वहीं ब्रजघाट में जलस्तर तेजी से खतरे के निशान की ओर बढ़ रहा है। ब्रजघाट में 197.65 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 199.34 मीटर पर है। जलस्तर बढ़ने से ब्रजघाट और खादर क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। वहीं ओसीदा जग्देपुर, कांकाठेर, मोहम्मदाबाद, कासमाबाद में फसल खराब हो रही है। खेतों में पानी भरे होने से गन्ना, धान और उड़द की फसल खराब होने की कगार पर पहुंच गई है।
तमाम किसानों के धान की पत्तियां पीली पड़ गईं हैं तो खेतों से धान की पौध भी बह गई है। गन्ना की फसल गल कर खेतों में बिछने लगी है। उड़द और लोबिया की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। पैदावार कम होने से किसानों को भारी क्षति होने का अनुमान है। रास्तों पर पांच-पांच फीट तक पानी भरा है।
क्या बोले किसान
उसकी बीस बीघा गन्ने की फसल है। खेत में पानी भरने से गन्ना झुक गया है। नीचे से गल भी गया है। जिससे गन्ने में बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है। एक बीघा में करीब 10 कुंतल गन्ना निकलता है, लेकिन इस बार यह औसत निकले इसमें शंका है। - नरेश, किसान, कांकाठेर
उसने 30 बीघा जमीन में सरबती धान की फसल बोई है। एक माह से धान की फसल गंगा के पानी में पूरी तरह से डूबी थी। अब पानी कुछ उतरा तो खेत में काफी जगह पर फसल ही नहीं है। गंगा के पानी में फसल बह गई। बाकी फसल की पत्तियां पीली पड़ गईं हैं। - ब्रह्मदेव, किसान, कासमाबाद
24 बीघा खेत में सरबती धान की फसल है, जो गंगा के पानी भरने से कुछ दिन पहले नजर भी नहीं आ रही थी। अब पानी कुछ उतरा तो एक चौथाई खेत से फसल गायब है, बाकी फसल पीली पड़ गई है। फसल रोकने के लिए पांच हजार की जिंक लगाई है, अभी और भी दवाओं का छिड़काव किया जाएगा, हालांकि लगता नहीं की भरपाई होगी। -बिसन, किसान, कांकाठेर