मूलरूप से गाजियाबाद के कविनगर थानाक्षेत्र निवासी दरोगा की अमरोहा के सैदनगली थाने में तैनाती है। 12 फरवरी को उनके पास दो अनजान नंबरों से व्हाट्सएप कॉल आई। फोन करने वाली महिला ने खुद को अपस्टोक इंवेस्टमेंट कंपनी का असिस्टेंट बताया और कंपनी में निवेश की गई रकम पर रोजाना पांच से दस प्रतिशत रिटर्न देने का झांसा दिया। इसके बाद 13 मार्च को अपस्टोक वैल्यू एडेड प्लान इनफॉरमेशन शेयरिंग ग्रुप में जोड़ लिया।
इसमें कुछ लोग शेयर बाजार में इंवेस्ट करने की बात कर रहे थे। इसके बाद कॉल करने वाली महिला ने दरोगा को एप्लीकेशन रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरकर अकाउंट खुलवा दिया। बाद में लिंक भेजकर प्ले स्टोर से एप्लीकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा। इस एप्लीकेशन का नाम यूएसप्रो है। लिहाजा, दरोगा ने महिला के कहने पर उसके बताए गए खाता नंबरों में अलग-अलग तिथि पर कुल 9.43 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। जबकि, महिला के बताए प्ले स्टोर से डाउनलोड कराए गए एक एप पर कुल जमा 7.53 लाख रुपये जमा दिखाए जा रहे थे।
12 अप्रैल को दरोगा ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट
दरोगा ने महिला से अपने रुपये वापस निकलने का तरीका पूछा तो उसने क्रेडिट स्कोर कम बताकर रुपये निकालने से इन्कार कर दिया। इसके बाद महिला ने पांच लाख रुपये और जमा करने के लिए कहा। साथ ही कहा कि जब तक पांच लाख जमा नहीं करेंगे तब तक रुपये नहीं निकाल पाएंगे। ठगी का एहसास होने पर दरोगा ने 12 अप्रैल को साइबर थाने में धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत मोबाइल नंबरों के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की थी।
साइबर थाना प्रभारी जितेंद्र बालियान ने बताया कि साइबर ठगों के खाते फ्रीज कर दरोगा की रकम होल्ड कर दी गई है। वहीं, दरोगा के साथ ठगी करने वाले उत्तराखंड के तीन साइबर ठगों को हिसार पुलिस ने करीब एक माह पहले गिरफ्तार कर लिया था है। 27 जून को अमरोहा पुलिस तीनों आरोपियों अमन, शाहिद और शाकिब को रिमांड पर लेकर आई थी और पुलिस ने तीनों से पूछताछ की। सोमवार को कोर्ट में पेश करके हिसार पुलिस तीनों आरोपियों को ले गई है।