गजरौला में टैंपो की छतों पर सफर कर जोखिम उठाते स्कूली बच्चे।
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शिक्षा विभाग और आरटीओ के अफसरों की अनदेखी से सड़क पर नियम तो रौंदे ही जा रहे हैं, नौनिहालों की सुरक्षा की अनदेखी की जा रही है। निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को अनफिट वाहनों और ट्रैक्टर-ट्रालियों, जुगाड़ आदि से स्कूल लाया, ले जाया जा रहा है। इस तरह नौनिहालों की सुरक्षा के लिए स्कूल वाहनों के लिए दी गई गाइड लाइन का भी पालन नहीं कराया जा रहा है।
जिले में तीन सौ से अधिक इंटरमीडिएट विद्यालय संचालित हैं। इसके अलावा करीब दो हजार निजी स्कूल अंग्रेजी और हिंदी माध्यम से संचालित हैं। इनमें से अधिकांश स्कूलों में दूर-दराज से भी छात्र-छात्राएं पढ़ने आते हैं। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों ने परिवहन की व्यवस्था कर रखी है, लेकिन इनमें सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
वे अनफिट वाहन संचालित कर रहे हैं। वहीं हिंदी माध्यम के ज्यादातर विद्यालयों ने बच्चों को ले आने-ले जाने की व्यवस्था तक नहीं की है। इससे विद्यार्थियों को डग्गामार वाहनों से जान जोखिम में डालकर विद्यालय आना-जाना पड़ता है। हाल यह है कि, कुछ स्कूलों के वाहनों में अवैध तरीके से गैस किट लगाए गए हैं। इसके अलावा हसनपुर, गंगेश्वरी क्षेत्र में जुगाड़, ट्रैक्टर ट्राली आदि से स्कूलों में बच्चे लाए जा रहे हैं।