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Amroha News: कागजों में महायोजना...धरातल पर विकास नदारद

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अमरोहा नगर पालिका, कारखाने में रखी ढोलक।
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अमरोहा। शहर के विकास के लिए अमृत योजना के तहत महायोजना लागू की गई है। लेकिन डेढ़ साल बीतने के बाद भी महायोजना सिर्फ कागजों में सिमट कर रह गई है। महायोजना को लागू कराने में सिर्फ खानापूर्ति ही हुई है। धरातल पर कोई काम नहीं हुआ। महायोजना में शामिल रिंग रोड बनाने की कोई कवायद शुरू नहीं हो सकी। ट्रांसपोर्ट नगर समेत औद्योगिक विकास के लिए कोई काम शुरू नहीं हो सका।
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श्रेणीबद्ध जमीनों का बैनामा कराने में भी परेशानी आ रही है। महायोजना के दायरे में आने वाली जमीनों की खरीद-फरोख्त भी बंद हो गई है।
शहर के विकास को महायोजना को लागू किया गया था। लेकिन लगभग डेढ़ साल बीतने के बाद भी महायोजना के तहत शहर में कोई काम नहीं हो सका है। शहर को जाम से निजात दिलाने को रिंग रोड बनाने का प्रस्ताव भी महायोजना में शामिल किया गया था। लेकिन इसके लिए भी कोई कवायद शुरू नहीं हो सकी है।
शहर के विकास को रफ्तार देने के लिए अमृत योजना के तहत शहर में महायोजना लागू करने की कवायद शुरू की गई थी। सेंटर फॉर सिम्बायोसिस ऑफ टेक्नोलॉजी एन्वायरमेंट एंड मैनेजमेंट (स्टेम) ने अमरोहा शहर व जोया के 35 गांवों का जीआईएस आधारित सर्वे कर मास्टर प्लान तैयार किया गया था। साल 2031 की जनसंख्या को ध्यान में रखकर तैयार हुई महायोजना से एक नए अमरोहा का विकास कराया जाना है।
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महायोजना के तहत हुए सर्वे के मुताबिक शहर की जनसंख्या 2031 में चार लाख 13 हजार 820 तक पहुंचने का अनुमान है। इसी को देखते हुए महायोजना का खाका तैयार किया गया था। अमरोहा में जाम प्रमुख समस्या है। आए दिन लगने वाले जाम से लोगों को दो-चार होना पड़ता है। इससे निजात दिलाने के लिए शहर के चारों ओर रिंग रोड बनाए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया था। शहर की जरूरी समस्या में शामिल इस रिंग रोड को बनाए जाने के लिए अभी तक भी कोई कवायद शुरू नहीं हो सकी। इसके अलावा शहर में औद्योगिक क्षेत्र व ट्रांसपोर्ट नगर भी महायोजना में बसाए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। लेकिन इसके लिए भी कोई काम शुरू नहीं हो सका है।


ढोलक कारोबारी भी कर रहे हैं औद्योगिक क्षेत्र की मांग
ढाेलक कारोबार यहां ओडीओपी के रूप में शामिल है। इसके लिए अधिकांश कार्य अमरोहा शहर के बीच में ही होता है। इससे प्रदूषण आदि का खतरा भी रहता है। ढोलक कारोबारी यहां पिछले काफी समय से ढोलक कारोबार के लिए औद्योगिक क्षेत्र बसाए जाने की मांग कर रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्र में ही कॉटनवेस्ट कारखाने स्थानांतरित होने से जल प्रदूषण की समस्या से भी निजात मिल सकेगी। लेकिन औद्योगिक क्षेत्र न बसने से इन कारोबार से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लकड़ी हस्तकला एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक अग्रवाल ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र बसने से कारोबारियों को काफी फायदा पहुंचेगा।

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7504.17 हेक्टेयर है विनियमित क्षेत्र का दायरा
महायोजना के अनुसार शहर के विनियमित क्षेत्र का दायरा 7504.17 हेक्टेयर है। महायोजना में आवासीय, व्यवसायिक व अन्य गतिविधियों का अलग-अलग वर्गीकरण किया गया है। महायोजना के लिए आवासीय, व्यवसायिक व अन्य गतिविधियों के लिए जमीनाें की श्रेणी और क्षेत्रफल तय किया गया है। आवासीय श्रेणी की जमीनों पर व्यवसायिक गतिविधियां नहीं हो सकती हैं। साथ ही व्यवसायिक जमीन पर आवासीय निर्माण के लिए बैनामा नहीं कराया जा सकता है। साथ ही हरित पट्टी व पार्क के लिए आरक्षित जमीनों पर कोई भी निर्माण नहीं हो सकता है।
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महायोजना में यह है भू-उपयोग श्रेणी का क्षेत्रफल
भू-उपयोग की श्रेणी - क्षेत्रफल (हेक्टेयर)
आवासीय - 2453.04
व्यावसायिक - 236.37
औद्योगिक - 278.40
सार्वजनिक, सांस्कृतिक सुविधाएं - 483.59
यातायात एवं परिवहन - 500.48
पार्क, खुले स्थल व खेल मैदान व हरित क्षेत्र - 4850.92
संरक्षित वन - 58.01
बाग - 683.51
श्मशान/ कब्रिस्तान - 46.95

तालाब, नदी, नाला, नहर, झील - 112.82
कृषि - 1636.04

शहर को विकसित करने के लिए पूरा प्रयास होगा। आमजन व व्यापारियों के हित में महायोजना के तहत जो भी काम होंगे उनको प्राथमिकता के साथ दिखवाया जाएगा।
- शैलेष कुमार दुबे, एसडीएम/ प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र
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