जनाना मस्जिद जिसमें शिया समुदाय की महिलाएं नमाज अदा करतीं है।
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सैकड़ों साल पुरानी रिवायत को अमरोहा की मुस्लिम महिलाओं ने जिंदा रखा है। मस्जिद में मुस्लिम महिलाओं की नमाज अदा करने की रिवायत अमरोहा में अभी भी बदस्तूर जारी है। शहर के शफातपोता मोहल्ले में जनाना मस्जिद में रोजाना शिया समुदाय की महिलाएं नमाज अदा करतीं है। साथ ही मस्जिद में नमाज अदा करने के सवाब की हकदार बनती हैं।
इराक, ईरान, अफ्रीका सहित खाड़ी देशों में महिलाएं भी मस्जिद में नमाज अदा करतीं हैं। जानकारों के मुताबिक महिलाओं के मस्जिद में नमाज अदा करने का जिक्र हदीस में भी किया गया है। यह एक रिवायत भी है। इस रिवायत अमरोहा में महिलाएं आगे बढ़ा रही हैं। शहर के शफातपोता मोहल्ले में जनाना मस्जिद है। जहां रोजाना महिलाएं बिना किसी रोक टोक के नमाज अदा करती हैं। बिना जमात के महिलाएं पांचों वक्त की नमाज पढ़ने पहुंचती हैं। इससे एक ओर पुरानी रिवायत जिंदा हैं तो दूसरी ओर महिलाओं को नमाज अदा करने का सवाब भी मिल रहा है।
132 साल पुरानी है अमरोहा की जनाना मस्जिद:
अमरोहा में महिलाओं की मस्जिद का इतिहास काफी पुराना है। मस्जिद की देखरेख करने वाले सैयद मोहम्मद सिब्तेन बताते हैं कि यह मस्जिद 132 साल पुरानी है। यह मस्जिद 1885 में बनी थी। मस्जिद की तामीर गुलाम मेंहदी ने करावाई थी। पहले सिर्फ तीन चार महिलाओं के लिए ही जगह थी। बाद में मस्जिद का दायरा बढ़ा दिया गया। गुलाम मेंहदी अंग्रेजी हुकूमत में फौज में हवलदार थे। उनकी तीन बेटियां साबरा खातून, कनिज फातमा और शायदा फातमा थी। उन्होंने अपनी इन बेटियों के लिए मस्जिद बनवाई थी। मस्जिद में करीब दस सफें लग सकती हैं। अजान होने के बाद यहां महिलाएं अलग-अलग अपनी नजाम पढ़ती हैं।