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नदीम की ख्वाहिश पूरी, मिली वतन की मिट्टी

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नदीम अब्बास का फाइल फोटो - फोटो : JPNAGAR
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नौगांवा सादात (अमरोहा)। कोरोना को लेकर दुनियाभर में उपजे ऐसे हालात में पांच दिन की देरी ही सही, आखिरकार नदीम अब्बास की ख्वाहिश पूरी हो गई। मौत के बाद उन्हें अपने वतन की मिट्टी नसीब हो गई। उन्हें मां-बाप की कब्र के बगल में दफन किया गया है। हालांकि इकलौटा बेटा अपने वालिद को आखिरी बार नहीं देख सका।
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नौगांवा सादात के मोहल्ला पापड़ी तालाब निवासी नदीम अब्बास पुत्र नजीर हुसैन करीब पैंतीस साल से कुवैत में रहते थे। जहां वह सब्जी का व्यवसाय करते थे। परिवार में पत्नी फरहत नाहिद, एक बेटा वजीर अब्बास और दो बेटियां है। बेटा दुबई में इंजीनियर है। बीवी और बेटियां नौगांवा में रहते हैं। बीच-बीच में ये लोग कुवैत आते जाते रहते हैं। चार अप्रैल को दिल का दौरा पड़ने से नदीम की मौत हो गई। इसके बाद उनकी ख्वाहिश के मुताबिक परिवार के लोग उनके शव को नौगांवा सादात लाने में जुट गए। चचेरे भाई कमाल अब्बास के मुताबिक पांच दिन के जद्दोजहद के बाद लॉकडाउन के हालात एयर एंबुलेंस से गुरुवार को उनका शव दिल्ली पहुंचा। जहां से नौगांवा सादात लाया गया। जहां उन्हें मां-बाप के बगल में सुुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया।
इंडियन एंबेसी ने मांगी थी दोनों भाइयों की आईडी और पासपोर्ट
नौगांवा सादात। शव इंडिया भेजने के लिए कुवैत एंबेसी ने इंडियन एंबेसी से संपर्क किया था। बाद में इंडियन एंबेसी ने नदीम के दोनों भाइयों की आईडी और पासपोर्ट जमा कराए। भाइयों ने नदीम की पोस्टमार्टम रिपोर्ट एंबेसी में जमा किया। इसके बाद प्रक्रिया आसान हो गई। बताया जाता है कि कुवैत में दूसरे देशों के लोगों की मौत पर उनका शव उनके ही मुल्क में भेजा जाता है।
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