गंगा के जलस्तर के साथ बढ़ी ग्रामीणों की धुकधुकी
ओसीता जग्देपुर और शीशोवाली गांव में भरा हुआ है घुटनों-घुटनों तक पानी
शुक्रवार को 25 सेमी फिर बढ़ा जलस्तर, 200.95 गेज मीटर पर पहुंचा
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला(अमरोहा)।
पर्वतीय क्षेत्र में फिर शुरू हुई झमाझम बरसात से मैदानी इलाकों में गंगा का जलस्तर बढ़ गया है। पिछले तीन दिन से स्थिर जलस्तर शुक्रवार को 25 सेमी बढ़कर 200.95 गेज मीटर पर पहुंच गया। जिससे गंगा किनारे गांवों में बाढ़ के पानी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं। गांव शीशोवाली में पहले से दस्तक दे चुका बाढ़ का पानी शुक्रवार को और बढ़ गया। पशुओं के लिए खेतों से चारा लाना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। नीचे वाले घरों के अंदर भी पानी घुस चुका है। करीब आधा दर्जन गांवों के हजारों बीघा कृषि क्षेत्रफल लहलहा रही फसलें लबालब हैं। ओसीता जग्देपुर में कृषि क्षेत्रफल में करीब साढ़े चार फीट गहरे पानी से होकर खेतों तक पहुंचने का किसान साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। किसानों की मुश्किलें हर दिन बढ़ती जा रही हैं। तिगरी मेला स्थल व कृषि क्षेत्रफल बाढ़ के पानी से जलमग्न हो गए हैं। लोगों को तिगरी में अंत्येष्टि के लिए भी सूखी जगह नहीं बची है। बाढ़ खंड द्वारा लगातार तटबंधन का कार्य कराया जा रहा है।
पहाड़ी इलाके में तीन दिन तक थमी रही बरसात का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। हरिद्वार व बिजनौर बैराज से गंगा में पानी छोड़े जाने से खादर के करीब आधा दर्जन गांवों के कृषि क्षेत्रफल में बाढ़ के हालात बन गए हैं। जलस्तर खतरे के निशान की तरफ तेजी से बढ़ने लगा। शुक्रवार को एक साथ पच्चीस सेमी जलस्तर बढ़ने से हालात और भी बदतर हो गए हैं। शीशोवाली गांव में पहले से दस्तक दे चुका बाढ़ का पानी और बढ़ गया है। अब लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खेतों से पशुओं के लिए चारा लाना आसान काम नहीं रह गया है। गांव में सभी के पास बुग्गी नहीं होने की वजह से लोगों को एक दूसरे का सहारा लेना पड़ रहा है। महिलाएं खेतों में पानी में खड़े चारे को काटकर एक गठरी सिर पर व एक ट्यूब पर रखकर तैराते हुए घर तक पहुंच रही है। घरों में खड़े कृषि यंत्रों को भी पानी ने घेर लिया है। गांव में जो घर नीचे स्थानों पर हैं। उन घरों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। बाढ़ के पानी से शीशोवाली में जनजीवन प्रभावित होने लगा है। गंगा के तेज बहाव के कारण कटान भी होना शुरू हो गया है। कटान की वजह से फसलें नष्ट होनी शुरू हो गई हैं। उधर, ओसीता जग्देपुर व जाटों वाली समेत कई गांवों के कृषि क्षेत्रफल में बाढ़ का पानी किसानों की मुश्किलें बढ़ाता जा रहा है।
रविवार को सप्ताह में दूसरी बार गंगा का जलस्तर तिगरी में बढ़कर 201 गेज मीटर तक पहुंच गया था। लेकिन सोमवार व मंगलवार को जलस्तर में करीब पच्चीस सेमी की कमी दर्ज की गई थी। जबकि बुधवार व गुरुवार को जलस्तर में कोई उतार चढ़ाव देखने को नहीं मिला था, लेकिन शुक्रवार को बाढ़ का पानी पच्चीस सेमी बढ़कर तिगरी में फिर 200.95 गेज मीटर हो गया। बाढ़ के पानी से तिगरी में लगने वाले कार्तिक मेला स्थल भी बाढ़ के पानी से पूरी तरह डूब चुका है। अंत्येष्टि के लिए भी लोगों को सूखा स्थान नहीं बचा है। जिससे परेशानी बनी हुई है। किसानों में बाढ़ की आशंका को लेकर बेचैनी बरकरार है।
ऐसे घट-बढ़ रही गंगा
सोमवार को ब्रजघाट में 200.70 व तिगरी में 200.95 गेज मीटर जलस्तर दर्ज किया गया था। जो मंगलवार को घटकर ब्रजघाट में 200.55 व तिगरी में 200.70 गेज मीटर दर्ज किया गया था। बुधवार व गुरूवार को जलस्तर में कोई उतार चढ़ाव देखने को नहीं मिला। लेकिन शुक्रवार को 25 सेमी बढ़कर ब्रजघाट में 200.75 व तिगरी में 200.95 गेज मीटर दर्ज किया गया। फिलहाल जलस्तर खतरे के निशान से ब्रजघाट में 201.9 गेज मीटर और तिगरी में 202.5 गेज मीटर से करीब 100.10 सेमी नीचे बह रही है। बाढ़ अफसरों द्वारा खार किसानों को लगातार चेतावनी दी जा रही है। हालांकि शुक्रवार को भी करीब एक लाख क्यूसेक पानी बिजनौर बैराज से गंगा में छोड़ा गया। जिसका असर शनिवार सुबह तक मैदानी इलाकों में देखा जा सकता है।
गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बाढ़ के गंगा किनारे कृषि क्षेत्रफल में बाढ़ के हालात बने हुए हैं। शीशोवाली की आबादी में भी बाढ़ का पानी घुस चुका है। अभी और जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है। बाढ़ की स्थिति से निपटने को तैयारी की गई है। ........प्रदीप कुमार, जेई बाढ़ खंड तिगरी।