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जांच में 9 पर्चे खारिज, अब मैदान में 46 उम्मीदवार

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विधानसभा चुनाव की निर्वाचन प्रक्रिया के अंतर्गत शनिवार को नामांकन प्रपत्रों की जांच की गई। जांच में दस नामांकन पत्रों में कमियां मिलने के बाद उन्हें खारिज कर दिया गया। इसमें नौगांवा सादात विधानसभा से दो, हसनपुर से पांच और मंडी धनौरा से दो नामांकनपत्र खारिज हुए है। जबकि बाकी सभी नामांकन जांच में सही मिलने पर वैध घोषित करते हुए सूची चस्पा कर दी गई है। जांच में पर्चा सही मिलने पर प्रत्याशियों ने राहत की सांस ली है। नौ पर्चे खारिज होने से अब मैदान में 46 प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं। सोमवार को नाम वापसी होगी। कई प्रत्याशी मैदान छोड़ सकते हैं।
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नामांकन प्रक्रिया के दौरान जिले की चार विधानसभा सीटों से 55 प्रत्याशियों ने पर्चा भर कर चुनाव में ताल ठोकी थी। जबकि पंद्रह पर्चे ऐसे थे, जो विभिन्न दलों के प्रत्याशियों ने डबल भरे थे। शनिवार को नामांकन प्रपत्रों की जांच की गई। अमरोहा विधानसभा सीट से सभी 11 प्रत्याशियों के पर्चे वैध मिले। नौगांवा सादात विधानसभा सीट से 14 प्रत्याशियों ने पर्चा भरा था। जांच में दो प्रत्याशियों के नामांकन में कमियां मिलने पर पर्चे निरस्त कर दिए गए हैं। इसमें 85 परिवर्तन समाज पार्टी से चंद्रपाल, समाजवादी आंदोलन पार्टी से शहनाज का पर्चा निरस्त हुआ है। दो प्रत्याशियों के पर्चे निरस्त होने से अब यहां बारह प्रत्याशी मैदान में रह गए हैं। जबकि हसनपुर विधानसभा सीट से 18 प्रत्याशियों ने पर्चा भरा था। जिसमें अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी से मोहम्मद तारिक, इंडिया जनशक्ति पार्टी से इंद्रजीत, निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में फहीम, संदीप और ऋषिपाल का पर्चा खारिज हो गया है। यहां अब कुल 13 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसके अलावा धनौरा विधानसभा सीट से कुल बारह प्रत्याशियों ने पर्चा भरा था, लेकिन नामांकनों में त्रुटि मिलने पर समाजवादी आंदोलन पार्टी से जितेंद्र और लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी से उर्मिला के पर्चे खारिज हो गए हैं। अन्य प्रत्याशियों के पर्चे सही मिले हैं। चारों विधानसभा सीट के आरओ द्वारा शाम तीन बजे के बाद जांच में सही मिलने वाले नामांकनों के वैध घोषित करते हुए नोटिस बोर्ड पर सूची चस्पा कर दी है। अब चारों विधानसभा सीट से 46 प्रत्याशी मैदान में रहे गए हैं। अब सोमवार को नाम वापसी होगी। उधर, नामांकनों की जांच के चलते कलक्ट्रेट में सुरक्षा व्यवस्था के कड़े बंदोबस्त रहे।
विधानसभा चुनाव में कितने प्रत्याशी मैदान में डटे रहेंगे और कितने मैदान छोड़ देंगे। इसकी तस्वीर सोमवार को नाम वापसी के बाद स्पष्ट हो जाएगी। क्योंकि उम्मीदवारों को एक दूसरे के समर्थन में पर्चा वापस लेने के लिए जोड़ तोड़ की राजनीति चल रही है। तो कुछ को एक दूसरे की वोट काटने के लिए चुनाव में खड़ा किया है। कई डमी प्रत्याशी भी हैं। चुनाव में खर्चा एडजेस्ट करने लिए डमी उम्मीदवार उतारे गए हैं।
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जिले की चार विधानसभा सीट पर 55 प्रत्याशी अपना भाग्य आजमाने के लिए चुनाव मैदान में उतरे थे। नौ प्रत्याशियों के पर्च खारिज होने के बाद अब मैदान में 46 उम्मीदवार रह गए हैं। इसमें से भी कई उम्मीदवार सोमवार को मैदान छोड़ सकते हैं। कई प्रत्याशियों के पर्चा वापस लेने की संभावना जताई गई है। वहीं कुछ प्रत्याशियों को एक दूसरे के समर्थन में नाम वापस लेने का दबाव दिया जा रहा है। इस दौरान जिले में जोड़तोड़ की राजनीति चल रही है। क्योंकि कुछ प्रत्याशियों को एक दूसरे के वोट काटने के लिए चुनाव मैदान में उतारा गया है। वहीं कुछ प्रत्याशियों ने चुनाव प्रचार पर होने वाला खर्चे एडजेस्ट करने के लिए डमी कैंडिडेट भी चुनाव में उतारे हैं। इससे डमी प्रत्याशियों के नाम पर गाड़ी आदि की परमिशन ले सकेंगे, जिससे चुनाव प्रचार में फायदा होगा। नाम वापसी की तिथि बीतने के बाद ही चुनाव की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। कितने प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा।
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