गजरौला/ढबारसी। दूरसंचार विभाग के अधिकारियों की टीम ने ढबारसी में लगे मोबाइल टॉवरों को क्लीन चिट दे दी है। रिपोर्ट में टॉवर से रेडिएशन का निकलना नहीं पाया गया। दरअसल ढबारसी में कैंसर से करीब पचास मौत हो चुकी है। वहीं आधा दर्जन लोग अभी भी कैंसर से जूझ रहे हैं। गांव वालों को टॉवर से निकलने वाले रेडिएशन और दूषित पानी से कैंसर होने की आशंका है।
ढबारसी मे कैंसर से हो रही मौत को लेकर गौरव भाटी ने प्रधानमंत्री को लिखा। जिस पर पीएमओ ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ दूरसंचार विभाग के अधिकारियों को जांच करने के आदेश जारी किए। छह जून को पीएम को भेजे गए पत्र में आशंका जताई थी कि मोबाइल टावर से निकलने वाली रेडिएशन (तरंगो) के कारण लोग कैंसर की चपेट में आ रहे हैं। टीम को पंद्रह दिन में रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए थे। अब अधिकारियों ने अपनी जांच में मोबाइल टॉवर से रेडिएशन के निकलने को लेकर इनकार कर दिया। वहीं मोबाइल टॉवरों को क्लीन चिट देते हुए गांव वालों की आशंकाओं को खारिज कर दिया। गौरतलब है कि ढबारसी में अब तक पचास मौत कैंसर की वजह से हो चुकी है। दो साल पहले कैंसर से मौतों का सिलसिला शुरु हुआ था। पिछले छह महीनों में यह तेज हो गया। फिलहाल आधा दर्जन लोग अभी भी कैंसर से जूझ रहे हैं। इसके अलावा दूसरे लोगों में भी कैंसर का डर बना हुआ है।
900 टीडीएस का पानी पी रहे लोग
ढबारसी का पानी इस कदर दूषित हो चुका है कि पीने लायक नहीं बचा। कुछ महीने पहले गांव के सरकारी हैंडपंपों के पानी की जांच हुई थी। जिसमें पानी में टीडीएस की मात्रा नौ सौ पाई गई। अफसरों ने पानी दूषित देख हैंडपंपों पर लाल निशान लगवा दिए थे। इसके बाद भी साफ पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। जिसके चलते लोगों को दूषित पानी पीना पड़ रहा है।
धरती की कोख में डाल रहे मल
कुछ ग्रामीणों की मानें तो ढबारसी में काफी शौचालय ऐसे हैं, जिनका मल बोरिंग के माध्यम से तीस से चालीस फीट नीचे धरती में डाला जा रहा है। जानकारों के अनुसार तीस से चालीस फीट नीचे मल डालना भूजल के लिए बेहद खतरनाक है। इससे पानी दूषित होता है। वहीं भूजल में टीडीएस की मात्रा बढ़ जाती है।