अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से ओसीता जग्देपुर के खेतों में लहलहा रही फसलों में करीब 18 दिनों से जमा बाढ़ के पानी से धान व गन्ने की फसलों के नष्ट होने का संकट गहरा रहा है। फसलों में रोग लगने लगा है। इससे किसानों की चिंता बढ़ रही है। खादर किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। बुधवार को गंगा के जलस्तर में पांच सेमी की कमी दर्ज की गई, लेकिन खादर क्षेत्र में मंडरा रही बाढ़ की आशंका बनी हुई है। बाढ़ अफसरों द्वारा लगातार तटबंधन का कार्य कराया जा रहा है।
पिछले दो दिन से पहाड़ी इलाकों में बरसात कम होने से इसका असर गंगा पर भी दिखाई दे रहा है। दो दिनों से गंगा के जलस्तर में कमी दर्ज की जा रही है। सोमवार को गंगा का जलस्तर बढ़कर 200.50 गेज मीटर के पार पहुंच गया था। लेकिन मंगलवार को पंद्रह सेमी की कमी दर्ज होने से जलस्तर 200.35 गेज मीटर हो गया था। बुधवार को भी जलस्तर में पांच सेमी की कमी होने से जलस्तर घटकर 200.30 हो गया। जलस्तर में उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है। लेकिन बाढ़ का पानी ओसीता जग्देपुर के खेतों में खड़ी फसलों के लिए बहुत बड़ी परेशानी बन गया है। पिछले 18 दिनों से धान व गन्ने की फसलों में दो से ढाई फीट तक बाढ़ का पानी भरा हुआ है। इससे फसलों के नष्ट होने का संकट गहराता जा रहा है। गन्ने की जड़े नीचे की ओर से काली पड़कर गलनी शुरू हो गई हैं। धान की फसल भी अब मुरझानी शुरू हो गई है। इससे किसानों की परेशानियां बढ़ती जा रही है। किसान रात दिन फसलों में जमा बाढ़ के पानी को निकालने के लिए हाथपैर मार रहे हैं। लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है। गंगा तटों पर सामान्य बाढ़ के हालत बने हुए हैं। बुधवार को भी गेज से 60 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जिसका असर गुरुवार सुबह तक देखा जा सकता है। सोमवार को तिगरी में 200.50 व ब्रजघाट में 200.30 गेज मीटर जलस्तर दर्ज किया गया था। जो पंद्रह सेमी घटकर मंगलवार को तिगरी में 200.35 व ब्रजघाट में 200.15 गेज मीटर हो गया था। इसमें पांच सेमी की कमी और दर्ज की गई। बुधवार को जलस्तर तिगरी में 200.30 व ब्रजघाट में 200.10 गेज मीटर दर्ज किया गया। फिलहाल जलस्तर ब्रजघाट में खतरे के निशान 201.9 गेज मीटर और तिगरी में 202.5 गेज मीटर से नीचे है। बाढ़ खंड द्वारा तटबंधन का कार्य लगातार कराया जा रहा है।