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जिले में पंजीकृत 700 एंबुलेंस दिल्ली, हरियाणा और एनसीआर में दौड़ रही

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अमरोहा। जिले के जोया और गजरौला की फर्म के पते पर पंजीकृत 700 एंबुलेंस दिल्ली और हरियाणा में दौड़ रही हैं। आरोप है कि इनके नाम और पते फर्जी हैं। इसका खुलासा आरटीआई के आवेदन के बाद स्थलीय सत्यापन से हुआ है। इसको आधार बनाते हुए सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल जग्गा ने परिवहन आयुक्त को शिकायती पत्र भेजा। तथ्य छिपा कर पंजीयन के मामले में अफसर गंभीर हो गए हैं। उनके निर्देश पर एआरटीओ से कई बिंदुओं पर जानकारी तलब की गई है।
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सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल जग्गा ने परिवहन विभाग के पंजीयन अधिकारी से फर्जी फर्म का गठन कर कूट रचित प्रपत्रों के जरिए 700 एंबुलेंस का पंजीयन करने का आरोप लगाया था। यह एंबुलेंस की संख्या का खुलासा एआरटीओ द्वारा आरटीआई के जवाब से हुई है। उनका दावा है कि एंबुलेंस के पंजीयन पत्रावली में वाहन के पंजीकृत स्वामियों द्वारा कारोबार के स्थान के पते के प्रमाण पत्र के रूप में कागजात लगाए गए हैं, वह मिथ्या और कूटरचित है। प्रपत्र केवल पार्टनरशिप डीड को फर्म निबंधक के कार्यालय में पंजीकृत कराए जाने का प्रमाण पत्र का भाग एक है जो किसी फर्म के पंजीयन का फर्म नहीं होता है। फर्म के पंजीयन का प्रमाण पत्र, राज्य वाणिज्य और व्यापार कर विभाग या केंद्रीय उत्पाद और सीमा शुल्क विभाग अथवा परिवहन विभाग द्वारा किसी परिवहन सेवा के रुप में कार्य करने के लिए जारी किया जाता है। सामाजिक कार्यकर्ता अनिल जग्गा ने बताया कि 700 एंबुलेंस के पंजीयन की शिकायत परिवहन आयुक्त से की गई है।
एआरटीओ ने जारी किया है नोटिस, जवाब नहीं
अमरोहा। एआरटीओ प्रशासन उद्भव त्रिपाठी ने फर्म के दो ने संस्था के दो मालिकों को नोटिस जारी किया है, लेकिन फर्म या उसके साझेदारों की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया है।
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जोया और गजरौला के नाम पते की हैं एंबुलेंस
अमरोहा। परिवहन कार्यालय के कर्मचारियों की साठगांठ से फर्जी पते पर एंबुलेंस का पंजीयन का मामला सामने आया है। जोया और गजरौला के नाम पते दर्ज हैं। जिस फर्म के जरिए पंजीयन हुआ है वह जिले में काम नही करती है।
कोरोना के दौर में ऐसे खुला मामला
सामाजिक कार्यकर्ता अनिल कुमार जग्गा ने बताया कि वर्ष 2020 में कोरोना के दौर में एंबुलेंस नहीं मिल पा रही थी। लोगों को आसान तरीके से एंबुलेंस उपलब्ध हो जाए इसके बारे में एआरटीओ कार्यालय से एंबुलेंस संचालकों के संदर्भ में आरटीआई से जानकारी मांगी गई तो 700 एंबुलेंस के पंजीयन का मामला सामने आया। उन्होंने बताया कि हालांकि उस वक्त एंबुलेंस जिले में उपलब्ध नहीं थी। इसमें 500 एंबुलेंस जिले की दो फर्म के नाम पते पर दर्ज मिलीं। जबकि स्थलीय सत्यापन के दौरान कोई फर्म संचालित नहीं मिली। इसके बाद उसे आधार बना कर शिकायत की गई।
यह है मामला
फर्जी फर्म के पते पर एंबुलेंस का पंजीयन
अमरोहा। दिल्ली और हरियाणा के एंबुलेंस संचालकों ने जिले को फर्जीवाड़े का ठिकाना बनाया है। फर्जी नाम और पते पर एंबुलेंस का पंजीयन कराने का मामला सामने आया है। जिले के लोगों को मेडिकल सेवा नहीं मिलती है। जबकि यह दिल्ली और एनसीआर में अवैध तरीके से संचालित होती है। अवैध तरीके से रोजाना की लाखों की काली कमाई करते हैं।
इसलिए कराया पंजीयन
अमरोहा। दिल्ली में एंबुलेंस संचालन के लिए सरकार ने नीति बनाई है। इसके चलते पैरामेडिकल स्टाफ रखना जरूरी है। जबकि उत्तर प्रदेश में एंबुलेंस के नाम पर ही पंजीयन हो जाता है। टैक्स में छूट अलग से मिलती है।
एंबुलेंस प्रकरण के पंजीयन के बारे में शिकायत मिली है। नोटिस जारी किया गया है। इस प्रकरण में लखनऊ स्तर से जानकारी तलब की गई है। परिवहन मुख्यालय के वरिष्ठ अफसरों ने एंबुलेंस के पता के बारे में पूछा, उन्हें बताया गया कि प्रकरण में नोटिस जारी किया गया है। उद्भव त्रिपाठी, एआरटीओ प्रशासन
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