अमरोहा। बासमती चावल के निर्यात में बाधा बन रहे दस कीटनाशक दवा की बिक्री और इस्तेमाल को शासन ने साठ दिनों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही इन कीटनाशकों के मिश्रण यानी साल्ट से बने अन्य कीटनाशकों का भी उपयोग नहीं किया जा सकेगा।
जिला कृषि अधिकारी बबलू कुमार ने बताया कि मंडल के पांचों जिलों में सुगंधित बासमती धान की खेती बड़े क्षेत्रफल पर की जाती है। मंडल में बासमती धान का उत्पादन करीब नौ लाख टन होता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका व यूरोपीय देशों में चावल की बड़ी मांग रहती थी। लेकिन पिछने तीन सालों से निर्यात में कमी आई है। फसल में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक इसकी बड़ी वजह माने गए हैं। आखिरी समय में कीटनाशकों का प्रभाव चावलों पर रह जाता है। उन्होंने बताया कि बासमती चावल के निर्यात व खपत में बाधा न आए, इसलिए ट्राईसाईक्लाजोल, क्लोरपाईरीफाॅस, इमिडाक्लोप्रिड, प्रोपिकोनाजोल, बुप्रोफेजिन, एसिफेट, थायोमेथाक्साम, प्रोफेनोफास, हेक्साकोनाजोल एवं कार्बेन्डाजिम का धान की फसल में इस्तेमाल 60 दिन के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है।
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