अमरोहा। कस्बे में स्थित 50 बेड संयुक्त चिकित्सालय की यदि शासन-प्रशासन ने सुध ली होती तो कोरोना महामारी के दौर में यह चिकित्सालय काफी मददगार साबित हो सकता था, लेकिन राजनीति की भेंट चढ़ने की वजह से संयुक्त चिकित्सालय सिर्फ नाम का रह गया है। सोमवार को उपजिलाधिकारी मांगेराम चौहान ने संयुक्त चिकित्सालय का निरीक्षण कर वहां मौजूद सुविधाओं को देखा।
वर्ष 2005 में कस्बे में एक जनसभा को संबोधित करने आए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने कार्यकर्ताओं की मांग पर कस्बे में 50 बेड संयुक्त चिकित्सालय की स्थापना की घोषणा की थी। करोड़ों रुपये की लागत से बनेेेेेे इस अस्पताल में तमाम आधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई गईं थीं, लेकिन सरकार बदलने के बाद इस अस्पताल की बेकद्री शुरू हो गई। बसपा सरकार में इस अस्पताल की ओर ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह हुआ कि यहां मौजूद मशीनें धूल फांक रही हैं। कुछ मशीनें जिला अस्पताल व गजरौला के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भेज दीं गईं हैं। यहां अभी भी 18 बेड मौजूद हैं। कोरोना महामारी के दौर में जहां लोगों को बेड व आक्सीजन नहीं मिल रही है। ऐसे में यह अस्पताल काफी मददगार साबित हो सकता है। एसडीएम मांगेराम चौहान ने बताया कि संयुक्त चिकित्सालय की क्षमता वैसे तो 50 बेड की है, लेकिन इमरजेंसी में यहां 100 रोगियों को भी भर्ती किया जा सकता है। उनका कहना है कि इस संबंध में वह जिलाधिकारी को अवगत कराएंगे।