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छुट्टी न मिलने से पांच पुलिसकर्मियों ने दिया इस्तीफा

Sun, 18 Dec 2016 12:12 AM IST
विकल सिंह/अमर उजाला अमरोहा
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औचक निरीक्षण का हवाला देकर फर्जी सीआईडी इंस्पेक्टर दुकानदारों से दो हजार रुपये तक ऐंठ रहा था। - फोटो : Demo Pic
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पुलिस महकमे में छुट्टियां न मिलने से किस कदर लोगों में हताशा भर रही है उसका नमूना तब देखने को मिला जब अमरोहा के सिटी सर्किल के विभिन्न थानों में तैनात पांच पुलिस कर्मियों ने अपना इस्तीफा भेज दिया। इनमें एक दरोगा, दो सिपाही और दो प्रोन्नत कांस्टेबल शामिल हैं। पुलिस कर्मियों के इस्तीफों से सर्किल में हड़कंप मच गया। अब पुलिस के आला अधिकारी मामले की लीपापोती और उन कर्मचारियों के इस्तीफे वापस करवाने के लिए उनके मान-मनौव्वल में जुट गए हैं।
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भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि पांचों पुलिस कर्मियों के इस्तीफे अभी स्वीकार नहीं किए गए हैं। ये पुलिसकर्मी लगातार कई दिनों से ड्यूटी कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर भी इन्हें अवकाश नहीं मिल रहा है।

निजी वजह और जरूरतें बताकर इन पुलिस कर्मियों ने अवकाश मांगा था चूंकि इन पांचों पुलिसकर्मियों के इस्तीफे स्वीकार नहीं किए गए हैं इसलिए  इनके नाम नहीं दिए जा रहे हैं। लेकिन इन इस्तीफों ने आला अधिकारियों की भी नींद उड़ा दी है। इन पुलिसकर्मियों को इस्तीफे वापस लेने के लिए समझाया जा रहा है।
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जरूरत के मुताबिक पुलिसकर्मियों को छुट्टी दी जाती है। किसी कर्मचारी के इस्तीफे का कोई मामला मेरे संज्ञान में नहीं है।- डॉ. शिवा शिंपी चन्नप्पा

शहर सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डा. इदरीश के मुताबिक, अवकाश नहीं मिलने से अगर कोई कर्मी मानसिक तनाव से जूझ रहा है तो उसको तमाम बीमारियां अपनी गिरफ्त में ले सकती है।संबंधित कर्मी हाईपर टेंशन से ग्रस्त हो सकता है। ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है। साइक्लोजिकल प्रेशर के साथ वह टेंशन में रहेगा।

पागलपन की हद तक जा सकता है। डिप्रेशन में आकर आत्महत्या व दूसरे को मार भी सकता है। जवान आत्महत्या कर लेते हैं या फिर साथियों को मार देते हैं। वह भी तनाव झेलते हैं। इसलिए ऐसा काम कर बैठते हैं। सप्ताह में कम से कम एक अवकाश तो हर किसी को मिलना ही चाहिए।

वीकली आफ मिलना बना सपना काफूर हुई चेहरे पर आई खुशी
अमरोहा। पुलिसकर्मियों के लिए साप्ताहिक अवकाश की सुविधा मिलना सपना बनकर रह गया है। मुख्यमंत्री और डीजीपी की ओर से 10 दिन के अवकाश के बाद एक दिन की छुट्टी मिलने की घोषणा के बाद उनके चेहरे पर आई खुशी अब काफूर हो चुकी है। हो भी क्यों न, घोषणा के चार माह बाद भी जिले में आज तक ये स्कीम लागू नहीं हो पाई। अधिकारी भी क्या करें। स्टाफ की कमी है और नागरिकों की सुरक्षा भी करनी है, इसलिए वो भी मजबूर हैं।

छुट्टी न मिलने पर तनाव झेल रहे पुलिसकर्मी अधिकारियों का विरोध तो कर सकते नहीं, चेहरे के भाव और उदासी भरे शब्दों से निराशा जरूर जाहिर करते हैं। थानों में ड्यूटी के भारी दबाव और छुट्टी नहीं मिलने की वजह से  पुलिस वाले अपने बच्चों को हफ्तों देख भी नहीं पाते। रोजाना लंबी और अनियमित अवधि की ड्यूटी करते हैं। स्टाफ की कमी के कारण उनकी शिफ्ट वाइज ड्यूटी भी नहीं लग पाती है।

लगातार काम, अनियमित भागदौड़, बदमाशों की टेंशन, परिवार से दूरी। इसका सीधा दुष्प्रभाव  उनके स्वास्थ्य, व्यवहार और कार्यों की गुणवत्ता पर पड़ता है। जिले में पुलिस बल की  कमी होने के चलते साप्ताहिक अवकाश देने की योजना विफल हो गई। नतीजा ये हुआ कि जिले में ये नियम लागू ही नहीं हो पाया। पुलिसकर्मी रोजाना लंबी अवधि की ड्यूटी कर रहे हैं। 
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