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वित्तीय वर्ष समाप्त होने को महज 43 प्रतिशत समूह को रिवॉल्विंग फंड

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अमरोहा। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की कवायद अधर में लटक गई है। स्वयं सहायता समूह (एसएसजी) के गठन, बचत अकाउंट और उन्हें रिवॉल्विंग फंड देने में महकमा फिसड्डी साबित हो रहा है। लक्ष्य के सापेक्ष महज 38 प्रतिशत समूह गठन और 43 प्रतिशत समूह को रिवॉल्विंग फंड मिल सका है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने में महज दो महीने और हैं ऐसे में लक्ष्य हासिल करना चुनौती बन गई है।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत देहात की महिलाओं को स्वयं सहायता समूह गठित करने की सहूलियत है। जिले के छह विकास खंडों में कुल 864 समूह खोलने का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन अब तक 530 समूह खोले गए हैं। इसके अलावा महज 487 समूह के अकाउंट खोले जा चुके हैं वहीं रिवॉल्विंग फंड की प्रगति भी खराब है। अब तक महज 239 समूह को रिवॉल्विंग फंड दिया जा चुका है। मालूम हो कि समूह के गठन के बाद इन महिलाओं को आर्थिक तौर पर कमजोर होना चाहिए। एक समूह में 10 से 20 महिलाएं सदस्य हो सकती हैं। गांव की महिलाएं ब्लॉक में एडीओ आईएसबी या ब्लॉक मिशन मैनेजर बीएमएम से मिल सकती हैं। सभी लोगों का आधार कार्ड जरुरी है। इसके बाद ब्लॉक की ओर से स्वयं सहायता समूह एसएसजी का बचत खाता खोला जाता है। यह अकाउंट अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के देखरेख में संचालित होता है। महिलाओं के समूह को तीन महीने तक बैठकें और पंच सूत्र का पालन करना होता है। इसके बाद इन लोगों को 15,000 रुपये रिवॉल्विंग फंड दिए जाते हैं। इसके बाद यह महिलाएं कारोबार के लिए लेन देन कर सकती हैं।
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