अमरोहा। नामांकन के बाद चुनाव जोर पकड़ने लगा है। लोकसभा चुनाव में जिले के माननीयों की प्रतिष्ठा दांव पर है। एक तरफ पूर्व माननीय है, तो एक तरफ वर्तमान माननीय है। केंद्र से लगाए शहर के सदन तक काबिज भाजपा के माननीयों पर जीत प्रदर्शन बरकरार रखने का दबाव है। वहीं सत्ता से बेदल हुए, सपा-बसपा के धुरंधरों को गठबंधन प्रत्याशी को जीताकर अपने-अपने दल के प्रदर्शन को सुधारने का दबाव है। फिलहाल जिले के माननीय अपने-अपने क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार के लिए जी से जान से लगे हैं।
आज से ठीक 22वें दिन जिल में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान होगा। लोकसभा क्षेत्र में चुनावी सरगमी तेज हो गई। हर कोई बैठक और सभाएं कर अपने पक्ष में मतदान करने के लिए अपील कर रहे हैं। भाजपा ने दोबारा से सांसद कंवर सिंह तंवर को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं गठबंधन ने कुुंवर दानिश अली, तो कांग्रेस ने सचिन चौधरी पर दाव खेला है। कोई प्रत्याशी जीते या कोई हारे लेकिन, इनकी जीत हार से जिले की माननीयों की प्रतिष्ठा जुड़ी है। उम्मीदवार की जीत हार पार्टी और सरकार में इनके कद काठी तय करेगी। सत्ता पक्ष के माननीयों में एक कैबिनेट मंत्री और तीन विधायक शामिल हैं। साथ में जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका और नगर पंचायतों के चेयरमैन शामिल हैं। ये माननीय अपने-अपने क्षेत्र पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में जनसंपर्क करने में लगे हैं। इनकी मेहनत कितनी कारगर होगी, ये चुनाव परिणाम ही बताएगा। फिलहाल माननीयों की प्रतिष्ठा दांव पर है।
भाजपा खेमे के जनप्रतिनिधियों पर एक नजर
कैबिनेट मंत्री चेतन चौहान
विधायक राजीव तरारा
विधायक महेंद्र सिंह खड़कवंशी
विधायक कमल मलिक
जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता चौधरी
नगर पालिका अध्यक्ष शशि जैन
धनौरा पालिका अध्यक्ष राजेश सैनी
गजरौला पालिका अध्यक्ष अंशु नागपाल
गठबंधन खेमे के माननीय और जनप्रतिनिधियों पर नजर
विधायक महबूब अली
एमएलसी परवेज अली
पूर्व कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर
पूर्व मंत्री जावेद आब्दी
पूर्व विधायक अशफाक अली खां
पूर्व कैबिनेट मंत्री चौधरी चंद्र पाल सिंह
पूर्व मंत्री सोमपाल सिंह
हसनपुर पालिका अध्यक्ष नीलम शादाब
जीत के लिए तरस रही कांग्रेस
अमरोहा। अमरोहा लोकसभा सीट पर जीत के लिए कांग्रेस लंबे समय से तरस रही है। यहां आखिरी बार वर्ष 1984 में कांग्रेस ने जीत का स्वाद चखा था। इसके बाद से कांग्रेस में सूखा पड़ा है। वहीं विधानसभा चुनाव में पार्टी का आखिरी एमएलए कब बना था, ये खुद कार्यकर्ताओं के जेहन से उतर गया होगा।