खुद के पाप धोकर मैली कर गए गंगा का आंचल
मेले के बाद तिगरी में घाटों पर बिखरी गंदगी खोल रही सफाई व्यवस्था की पोल
ग्रामीण व श्रद्धालु बेहाल, मेले में सप्ताहभर से चलाया जा रहा था सफाई अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
गजरौला(अमरोहा)।
कार्तिक पूर्णिमा पर उत्तर भारत के ऐतिहासिक तिगरी गंगा मेले का शनिवार को समापन हो गया। गंगा के घाटों पर हर ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। खुद के पाप धोकर लोग मांग गंगा का आंचल गंदा कर गए। घाट और मेला परिसर में फैली गंदगी की बदबू से तिगरी गांव के ग्रामीण बेहाल हैं। प्रशासन की सफाई के दावे खोखले साबित हुए हैं।
प्रशासन व जिला पंचायत द्वारा संयुक्त रूप से लगाए गए ऐतिहासिक तिगरी गंगाधाम मेले की तैयारियों के दौरान सफाई को लेकर खूब मुद्दा उठाया था। मेले को ओडीएफ रखने का लक्ष्य भी रखा गा था। इसके लिए सप्ताहभर से मेले में सफाई कर्मचारियों द्वारा सफाई अभियान चलाया जा रहा था। लिम्का बुक में रिकार्ड बनाने के लिए स्वच्छता का प्रतीक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का चश्मा भी मेले की शोभा बढ़ा रहा था। यही नहीं मेला समापन के बाद प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नौ नवंबर को गंगा की रेती पर मानव शृंखला बनाकर देश का नक्शा बनाने की तैयारी है। दावा किया जा रहा है कि यह कीर्तिमान लिम्का बुक में दर्ज होगा। लेकिन कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान के बाद थोड़ी सी भीड़ कम होने पर रविवार को दिखी गंदगी से सफाई व्यवस्था की पोल खुल गई। सेक्टर एक से लेकर 11 तक गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। घाटों पर तो स्थिति बेहद निराशाजनक दिखाई दे रही है। गंदगी का आलम यह है कि वहां मौजूद श्रद्धालुओं व गांव तिगरी के ग्रामीणों का रहना दूभर हो रहा है।
- वर्जन
गंगा के घाटों पर किसी भी हालत में गंदगी नहीं होने दी जाएगी। मेला समापन हो गया है। सफाई कर्मचारियों को लगाकर गंगा घाटों पर सफाई अभियान चलाया जाएगा। सफाई व्यवस्था दूरस्थ की जाएगी।
...गंभीर सिंह, मेला मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम मंडी धनौरा।