गजरौला। गन्ना विकास परिषद में पर्यवेक्षक के 20 पद है जबकि तैनाती सिर्फ सात की है। खाली पदों के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार भी ठीक से नहीं हो पा रहा है। वहीं गन्ने की औसत उपज की गणना भी नहीं हो पा रही है।
गजरौला गन्ना विकास परिषद में मझरे समेत 293 गांव आते हैं। इनके किसान 19174 हेक्टेयर रकबे में गन्ने की खेती करते हैं। परिषद के गन्ना किसान सहकारी चीनी मिल हसनपुर-गजरौला (कालाखेड़ा) को 14 क्रय केंद्र, त्रिवेणी शुगर मिल चंदनपुर-9, करीमगंज-17, असमोली-9 और बेलवाड़ा चीनी मिल को दो क्रय केंद्रों के माध्यम से गन्ने की आपूर्ति करते हैं। चंदनपुर और हसनपुर चीनी मिल को गन्ना किसानों द्वारा गेट पर गन्ना की आपूर्ति की जाती है।
मगर परिषद के पास गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त संख्या में पर्यवेक्षक नहीं हैं। परिषद के पास महज सात पर्यवेक्षक हैं जबकि कम से कम 20 होने चाहिए। ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक रामजीवन ने बताया कि पर्यवेक्षक कम होने के कारण विभागीय कार्य करने में दिक्कत होती है। हालांकि, पदों पर नियुक्ति के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
यह कार्य कराते हैं गन्ना विभाग के पर्यवेक्षक
गन्ना विकास परिषद के पर्यवेक्षक गन्ना किसानों को सहफसली के लिए प्रेरित करते हैं। उनको उन्नत किस्म के बीजों की जानकारी देते हैं। बीज और खाद मुहैया कराते हैं। विभाग द्वारा छूट पर मिलने वाले कृषि उपकरणाें और यंत्रों की जानकारी भी पर्यवेक्षक ही देते हैं। गन्ने की औसत उपज की गणना कराते हैं। ट्रंच विधि से गन्ने की बुवाई के लिए किसानों को प्रेरित और जागरूक करने का कार्य भी पर्यवेक्षक ही करते हैं।